चंडीगढ़: लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में पूरे भारतवर्ष की तरह चंडीगढ़ में भी ‘यूनिटी मार्च’ (एकता मार्च) का भव्य आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर इस ऐतिहासिक अवसर को चिह्नित करने के लिए अर्बन तिरंगा पार्क, सेक्टर 17 में सुबह से ही ‘विकसित भारत’ के समर्थक और आम नागरिक जुटने लगे।
जनसैलाब और देशभक्ति का माहौल:
सुबह 10 बजे तक, तिरंगा पार्क हजारों लोगों की भीड़ से खचाखच भर गया था। हाथों में तिरंगा लिए हुए लोग ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से पूरे वातावरण को देशभक्ति के रंग में रंग रहे थे। एक ओर जहां विभिन्न आयु वर्ग के नागरिक उत्साह से भरे थे, वहीं दूसरी ओर स्कूल के बच्चे भी हाथों में तिरंगा और सरदार वल्लभभाई पटेल के मुखौटे पहने, ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाते हुए तिरंगे की शान बढ़ा रहे थे। बच्चों की अलग-अलग वेशभूषा ने सभी का मन मोह लिया।
राज्यपाल ने नशा मुक्ति का दिलाया संकल्प:
जैसे ही पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया का आगमन हुआ, ‘भारत माता की जय’ के नारों से पूरा तिरंगा पार्क गूंज उठा। प्रशासक ने तिरंगा झंडा दिखाकर यूनिटी मार्च को विधिवत रूप से रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने संदेश में उपस्थित लोगों को नशा से दूर रहने का आह्वान किया और सभी को नशा मुक्ति का संकल्प भी दिलाया।
सरदार पटेल का जीवन दर्शन:
मंच पर कई दिग्गज नेता भी विराजमान थे। प्रशासक कटारिया ने सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन पर आधारित कुछ महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि कैसे सरदार पटेल ने 1918 के खेड़ा सत्याग्रह में संघर्ष किया था, जब भयंकर सूखा पड़ा था। सरदार पटेल ने महात्मा गांधी और अन्य नेताओं के साथ मिलकर किसानों का नेतृत्व किया और उन्हें कर न देने के लिए प्रेरित किया। उनके अथक प्रयासों से सरकार झुकी और उस वर्ष कर न देने की छूट दी गई। इसके बाद 1928 में बारडोली सत्याग्रह भी सरदार पटेल के मजबूत नेतृत्व का प्रतीक बना।
प्रमुख हस्तियों की भागीदारी:
इस यूनिटी मार्च में कई नेताओं और गणमान्य व्यक्तियों ने हिस्सा लिया, जिनमें भूतपूर्व सांसद सतपाल जैन, चंडीगढ़ मेयर हरप्रीत कौर बबला, राज्यसभा सांसद गुरनाम सिंह संधू, रामवीर भट्टी, सुभाष चावला और विभिन्न सेक्टरों एवं कॉलोनियों के पदाधिकारी शामिल थे। यह यूनिटी यात्रा तिरंगे की शान बढ़ाती हुई चंडीगढ़ के अलग-अलग सेक्टरों से होकर गुजरी और अंत में सेक्टर 17 में ही इसका समापन हुआ। यह आयोजन सरदार पटेल के राष्ट्र के प्रति समर्पण, उनकी एकता की भावना और उनके संघर्षों को याद करने का एक सशक्त माध्यम बना।
