चंडीगढ़: पीज़ीआई फॉरेस्ट एरिया से धनास और चितकारा स्कूल की ओर जाने वाली सड़क इन दिनों इंसानी संवेदनहीनता की गवाह बनी हुई है। जिस रास्ते से गुजरते हुए शुद्ध हवा की उम्मीद की जाती थी, वहां अब जगह-जगह पॉलिथीन और प्लास्टिक की बोरियों के ढेर बिखरे पड़े हैं। विडंबना यह है कि कुछ लोग बंदरों और नीलगायों को फल या चना खिलाने के नाम पर वहां रुकते तो हैं, लेकिन सारा सामान प्लास्टिक में फेंककर चले जाते हैं। यह लापरवाही न केवल पर्यावरण के लिए खतरा पैदा कर रही है, बल्कि इन बेजुबान जानवरों को बीमार कर रही है और पेड़ों की जड़ों तक अपना जहरीला प्रभाव छोड़ रही है।
नंबर वन की दौड़ में बाधा
चंडीगढ़ को देश की ‘नंबर वन’ सिटी बनाने की जद्दोजहद एक तरफ जारी है, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोगों की गलत विचारधारा इस सपने की राह में रोड़ा अटका रही है। सड़क के किनारे खाली पड़ी जगहों को कूड़ेदान समझ लिया गया है, जिससे शहर की सुंदरता और स्वच्छता दोनों पर दाग लग रहा है। प्रशासन का मानना है कि जब तक नागरिकों की सोच में बदलाव नहीं आएगा, तब तक केवल सरकारी प्रयासों से शहर को पूरी तरह स्वच्छ बनाना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।
लापरवाही पर विभाग का कड़ा हंटर
स्वच्छता बनाए रखने के लिए सैनिटेशन विभाग अब एक्शन मोड में नजर आ रहा है। इसी हफ्ते फॉरेस्ट एरिया में कचरा फेंकने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई। विभाग को जांच के दौरान एक टेलर की दुकान का कचरा मिला, जिस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए 13041 रुपये का भारी जुर्माना लगाया गया। इसी तरह, नियमों की अनदेखी करने वाले एक पेट्रोल पंप पर भी 13041 रुपये की पेनल्टी लगाई गई है। विभाग की यह कार्रवाई उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो वन क्षेत्र को डंपिंग ग्राउंड समझने की भूल कर रहे हैं।
रात के अंधेरे का खेल और सुझाव
गंदगी फैलाने का एक बड़ा खेल रात के अंधेरे में खेला जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह देखा गया है कि रात 9 से 10 बजे के बाद जब वेंडर्स अपनी रेहड़ी लेकर वापस लौटते हैं, तो वे दिनभर का सारा कचरा सड़क किनारे या फॉरेस्ट एरिया में फेंक देते हैं। इसके अलावा, कई लोग अपने घरों और दुकानों का कचरा पॉलिथीन में भरकर रात के समय यहां फेंक जाते हैं। सैनिटेशन विभाग को सुझाव दिया गया है कि ऐसे वक्त में विशेष गश्त बढ़ाई जाए और इन लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि पर्यावरण और वन्यजीवों को सुरक्षित रखा जा सके।
संपादकीय टिप्पणी: फॉरेस्ट एरिया में बढ़ता कचरा केवल नगर निगम की विफलता नहीं, बल्कि नागरिक नैतिकता के पतन का संकेत है। बेजुबान जानवरों को खाना खिलाने की आड़ में पॉलिथीन छोड़ जाना ‘पुण्य’ नहीं बल्कि ‘पाप’ की श्रेणी में आता है, क्योंकि यही प्लास्टिक उनकी मौत का कारण बनता है। 13 हजार रुपये से अधिक का जुर्माना एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन जब तक रात के अंधेरे में कचरा फेंकने वाले वेंडर्स और दुकानदारों पर सीसीटीवी या नाइट पेट्रोलिंग के जरिए नकेल नहीं कसी जाएगी, तब तक धनास की यह हरियाली खतरे में ही रहेगी।
