जालंधर: गायन की दुनिया में एक और सुनहरी कड़ी जुड़ गई जब हर्ष गोगी का नया शिव भजन “डमरू डम डम डम” आज जालंधर में बड़े धूम-धाम और उत्साह के साथ रिलीज़ किया गया। रिलीज़ समारोह में भारी संख्या में श्रद्धालु और श्रोतागण शामिल हुए, जिन्होंने पूरे आयोजन को एक आध्यात्मिक उत्सव का रूप दे दिया। यह भजन सिर्फ़ एक गीत नहीं, बल्कि भक्ति और संगीत का एक अद्भुत संगम साबित हुआ, जिसने हर श्रोता के दिल पर एक अमिट छाप छोड़ी।
आध्यात्मिक उत्साह और जयकारों से गूंजा वातावरण
कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिससे पूरा वातावरण पवित्रता और आध्यात्मिकता से भर गया। जैसे ही भजन की पहली प्रस्तुति मंच पर हुई, पूरा माहौल “हर हर महादेव” और “बम बम भोले” के जयकारों से गूंज उठा। उपस्थित जनता ने ताली-थाप और नृत्य के साथ गायक हर्ष गोगी को अपार स्नेह और सम्मान दिया। युवा हो या बुजुर्ग, हर कोई इस रचना में डूब गया और मंच के सामने नृत्य करते हुए अपनी श्रद्धा प्रकट की।
मुख्य अतिथियों का सम्मान और आशीर्वाद
इस अवसर पर मुख्य अतिथि हेम राज कुमार जी ने हर्ष गोगी, नरेश नकोदरी, परमजीत मेहरा, सरवन हंस, सनी भट्टी, जसवीर जस्सी और लेख राज सहित पूरी टीम को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के भजन न सिर्फ़ संगीत की आत्मा हैं, बल्कि समाज को अध्यात्म से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी हैं। वहीं, पूज्य स्वामी शिवा भारती जी ने मंच पर आशीर्वाद देते हुए घोषणा की कि हर्ष गोगी और उनकी टीम को उनके आश्रम में विशेष प्रस्तुति देने हेतु आमंत्रित किया जाएगा, जो कि टीम के लिए एक बड़ा सम्मान है। भजन के सुरों और ताल पर उपस्थित लोग झूम उठे। कार्यक्रम में आए श्रद्धालुओं ने कहा कि हर्ष गोगी का यह भजन दिल को छू लेने वाला है और भगवान भोलेनाथ की भक्ति में पूरी तरह डुबो देता है। इस गीत को संगीतकार सूरज कश्यप ने अपने सुरों से सजाया है, जबकि इसके बोल मोनिका द्वारा लिखे गए हैं।
सोशल मीडिया पर मिली जबरदस्त सराहना
रिलीज़ के तुरंत बाद ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस भजन को खूब सराहा जा रहा है। यूट्यूब चैनल ‘सोलो नैक्स’ (Solo Knacks) पर रिलीज़ हुए इस भजन ने अल्प समय में ही हजारों दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर लिया है, जो इसकी लोकप्रियता का प्रमाण है। इस भजन की रिलीज को एक बड़े त्योहार के रूप में देखा गया। लोगों ने न सिर्फ़ तालियां बजाईं, बल्कि भोले के नाम पर जोश के साथ नाचते भी नजर आए। स्वामी शिवा भारती जी के आशीर्वाद से यह भजन और भी रूहानी रंग में रंग गया, जिससे यह सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि एक धार्मिक अनुभव बन गया।
