चंडीगढ़: दिवाली का पावन पर्व आने से पहले ही बाज़ारों में इसकी धूम देखी जा सकती है। हर तरफ़ बाज़ार रंग-बिरंगी लाइटों से सजे हुए हैं, और लोग अपने घरों तथा दुकानों को रोशनी से जगमगा रहे हैं। इस वर्ष की दिवाली विशेष रूप से उत्साहपूर्ण है, क्योंकि 14 वर्षों के वनवास के बाद भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता की अयोध्या वापसी का यह पवित्र अवसर है। उनके आने की खुशी में हर तरफ़ उत्साह और आनंद की लहर है।
लोग भगवान राम के आगमन का स्वागत पारंपरिक रूप से दीपक और मोमबत्तियों से कर रहे हैं, साथ ही आतिशबाज़ी करके अपनी खुशी का इज़हार कर रहे हैं। इस शुभ अवसर पर एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर मुँह मीठा करने और बधाइयाँ देने का सिलसिला भी शुरू हो चुका है।
बाज़ारों में दिवाली से संबंधित सभी प्रकार की दुकानें सज चुकी हैं। मिट्टी के दिए, विभिन्न आकार और रंगों की मोमबत्तियाँ, ताज़ी मिठाइयों की दुकानें, आकर्षक उपहारों के स्टॉल और घर की सजावट का हर सामान चारों तरफ़ आसानी से उपलब्ध है। खरीदारों की भीड़ हर दुकान पर देखी जा सकती है, जो अपने घरों को सजाने और प्रियजनों को उपहार देने के लिए उत्सुक हैं।
लोग इस उल्लासपूर्ण माहौल में एक-दूसरे को आने वाली दिवाली की शुभकामनाएँ दे रहे हैं, और इस पर्व को यादगार बनाने के लिए तैयारियां ज़ोरों पर हैं। चारों तरफ़ फैली यह रौनक और उत्साह दर्शा रहा है कि दिवाली का त्योहार भारतीय संस्कृति में कितना महत्व रखता है, और यह सिर्फ़ एक पर्व नहीं, बल्कि खुशियों और एकजुटता का प्रतीक है।
