धनास, चंडीगढ़ : 21 नवंबर सुबह करीब 8 बजे, धनास जंगल सड़क के पास एक बारहसिंगा अज्ञात वाहन की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हो गया। बारहसिंगा दर्द से कराह रहा था और उसकी गर्दन पर गंभीर चोट लगी हुई थी। घटनास्थल पर राहगीरों की भीड़ जमा थी। हमारे पत्रकार, जब वहां से गुजर रहे थे, तो उन्होंने घायल बारहसिंगा को देखा। लोगों के सहयोग से उसे थोड़ा हिलाने की कोशिश की तो वह दर्द से छटपटाने लगा। जानवर की दर्दनाक स्थिति देखकर पत्रकार ने तुरंत 112 नंबर पर फोन किया। पुलिस ने पत्रकार को वाइल्डलाइफ विभाग का हेल्पलाइन नंबर दिया, जिस पर संपर्क करके सहायता मांगी गई। वाइल्डलाइफ विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और बारहसिंगा को सावधानी से अपनी गाड़ी में डालकर नेपली फ़ॉरेस्ट हॉस्पिटल ले जाया गया। वहां उसका इलाज तुरंत शुरू कर दिया गया है और उम्मीद है कि वह जल्द स्वस्थ हो जाएगा।
वन्यजीवों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल:
इस घटना ने धनास फ़ॉरेस्ट एरिया में वन्यजीवों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह कोई पहली घटना नहीं है जब जंगली जानवर सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हुए हों। पत्रकार ने इस संबंध में सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:
- लोहे का जाल: फ़ॉरेस्ट एरिया के चारों ओर लोहे का जाल लगाया जाना चाहिए, ताकि जंगली जानवर आसानी से सड़क पर न आ सकें।
- साइन बोर्ड: सड़क पर बड़े-बड़े साइन बोर्ड लगाए जाने चाहिए, जिन पर स्पष्ट रूप से लिखा हो कि “आगे फ़ॉरेस्ट एरिया है, कृपया गाड़ी धीरे चलाएं”। इससे वाहन चालक सचेत रहेंगे और दुर्घटनाओं को टाला जा सकेगा।
पत्रकार ने जोर देकर कहा कि “जानवर तो जानवर हैं, हमें इनको बचाना चाहिए, यह हमारी धरोहर हैं।” सरकार को इस दिशा में तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि वन्यजीवों को ऐसे हादसों से बचाया जा सके। पहले भी इस क्षेत्र में कई वाहन जंगली जानवरों से टकराकर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और कई जानवर अपनी जान गंवा चुके हैं। यह समय है कि इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान केंद्रित किया जाए।
