चंडीगढ़ : सिटी ब्यूटीफुल के सेक्टर-43 और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है। क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर और सुलभ बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रयास तेज कर दिए गए हैं। इसी कड़ी में वार्ड संख्या 23 की एरिया पार्षद प्रेमलता ने सीनियर डिप्टी मेयर जसबीर सिंह बंटी के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की।
डोर-स्टेप हेल्थकेयर पर जोर: अधिकारियों से मुलाकात
पार्षद प्रेमलता ने स्वास्थ्य निदेशक सौरव कुमार अरोड़ा और संयुक्त आयुक्त ईशा कंबोज से मुलाकात कर सेक्टर-43 में सरकारी मेडिकल डिस्पेंसरी की शीघ्र स्थापना की मांग दोहराई। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि स्थानीय निवासियों, विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी दूर-दराज के अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं, जिससे उन्हें मानसिक और शारीरिक परेशानी झेलनी पड़ती है।
इटावा डिस्पेंसरी का होगा कायाकल्प
बैठक के दौरान सीनियर डिप्टी मेयर जसबीर सिंह बंटी ने न केवल नई डिस्पेंसरी की वकालत की, बल्कि मौजूदा बुनियादी ढांचे को सुधारने का प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने गांव इटावा की डिस्पेंसरी को अपग्रेड करने की मांग करते हुए वहां निम्नलिखित सुविधाओं पर जोर दिया:
- डे केयर सुविधा: मरीजों के लिए बेड की व्यवस्था।
- आधुनिक लैबोरेटरी: सभी प्रकार के मेडिकल टेस्ट की सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराना।
बंटी ने स्पष्ट किया कि नगर निगम की प्राथमिकता आम नागरिकों को उनके घर के नजदीक विश्वस्तरीय और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।
प्रशासन का आश्वासन: जल्द पूरी होंगी औपचारिकताएं
स्वास्थ्य निदेशक सौरव कुमार अरोड़ा और संयुक्त आयुक्त ईशा कंबोज ने पार्षद और सीनियर डिप्टी मेयर की मांगों को जायज ठहराते हुए आश्वासन दिया कि विभाग इस मामले पर पूरी गंभीरता से काम कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, सेक्टर-43 की डिस्पेंसरी से संबंधित सभी कागजी और तकनीकी औपचारिकताओं को जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएगा ताकि निर्माण कार्य शुरू हो सके। स्वास्थ्य सेवाओं का विकेंद्रीकरण समय की मांग है। सेक्टर-43 में डिस्पेंसरी खुलने से जीएमसीएच-32 और पीजीआई जैसे बड़े अस्पतालों पर मरीजों का बोझ भी कम होगा।
