चंडीगढ़: सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ का सबसे सुरक्षित और वीआईपी माना जाने वाला सेक्टर-19A अब चोरों के निशाने पर है। जहां बड़े-बड़े प्रशासनिक अधिकारी निवास करते हैं, वहां एक गरीब ई-ऑटो चालक की रोजी-रोटी पर चोरों ने सेंध लगाकर पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। सेक्टर-19A के मकान नंबर 242 में रहने वाले ई-ऑटो चालक सुमित के साथ हुई इस वारदात ने स्थानीय निवासियों में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है।
वारदात का तरीका: ऑटो चोरी कर 500 मीटर दूर ले गए चोर
पीड़ित सुमित ने बताया कि वह हर रात की तरह अपना ई-ऑटो घर के बाहर खड़ा कर सोने चला गया था। सुबह जब वह काम पर जाने के लिए बाहर आया, तो ऑटो वहां से नदारद था। तुरंत 112 नंबर पर सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। काफी मशक्कत के बाद ऑटो घर से महज 500 मीटर की दूरी पर लावारिस हालत में बरामद हुआ।
सुमित की सूझबूझ काम आई कि वह रात को ऑटो की बैटरियां निकालकर घर के अंदर रख लेता है, जिससे बड़ी चोरी टल गई। लेकिन चोर ऑटो के पिछले दोनों टायर खोलकर रफूचक्कर हो गए।
सीसीटीवी ने खोली पोल: दूसरे ऑटो से किया ‘टो’
जब पुलिस और स्थानीय लोगों ने पास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। फुटेज में दिखाई दिया कि चोर एक अन्य ऑटो की मदद से सुमित के ऑटो को बांधकर (टो करके) खींच ले जा रहे थे। पुलिस विभाग अब अन्य कैमरों और फुटेज के जरिए चोरों के इस गिरोह की तलाश में जुट गया है।
आम आदमी की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
इस घटना ने चंडीगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली और रात्रि पेट्रोलिंग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर वीआईपी सेक्टर ही सुरक्षित नहीं है, तो शहर के अन्य हिस्सों में आम आदमी खुद को कैसे सुरक्षित महसूस करेगा? क्या पुलिस प्रशासन केवल चारदीवारी के भीतर ही सीमित है या सड़कों पर प्रभावी पेट्रोलिंग भी हो रही है?
शहर के लाइट पॉइंट्स पर ‘खतरे’ की घंटी
चोरी की बढ़ती वारदातों के बीच शहर की एक और गंभीर समस्या उभरकर सामने आ रही है। चंडीगढ़ में भिक्षावृत्ति (भीख मांगना) पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन इसके बावजूद हर बड़े लाइट पॉइंट पर:
- गुब्बारे बेचने वालों की आड़ में संदिग्ध लोग।
- गोद में बच्चे लेकर भीख मांगती महिलाएं।
- बिना किसी जांच के घूमते हुए संदिग्ध बाहरी व्यक्ति।
इनकी मौजूदगी न केवल यातायात को बाधित करती है, बल्कि यह सुरक्षा के लिहाज से भी बड़ा खतरा हो सकते हैं। पुलिस द्वारा इनकी समय-समय पर छानबीन न करना किसी बड़ी घटना को न्योता दे सकता है।
संपादकीय टिप्पणी: चंडीगढ़ जैसे योजनाबद्ध शहर में चोरों का बेखौफ होकर वीआईपी इलाकों में ऑटो ‘टो’ करके ले जाना प्रशासन के लिए शर्मिंदगी का विषय है। पुलिस को केवल फाइलों में नहीं, बल्कि जमीन पर मुस्तैदी दिखानी होगी ताकि सुमित जैसे मेहनतकश लोगों का विश्वास कानून पर बना रहे।
