नकोदर: नकोदर के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक विजिटिंग कार्ड चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यह कार्ड केवल पहचान का जरिया नहीं, बल्कि भारतीय संविधान के गौरव और सरकारी मर्यादाओं के उल्लंघन का जीता-जागता प्रमाण नजर आ रहा है। मामला एक राजनीतिक दल के पदाधिकारी द्वारा अपने निजी कार्ड पर ‘भारत के राज्य चिन्ह’ (अशोक स्तंभ) और ‘पंजाब सरकार’ के नाम के अवैध इस्तेमाल से जुड़ा है।
राजनीतिक कद, लेकिन रंग ‘सरकारी’
सोशल मीडिया और गलियारों में घूम रहे इस कार्ड पर एक तरफ गरिमामयी अशोक स्तंभ अंकित है और ऊपर बड़े अक्षरों में “Govt. of Punjab” लिखा गया है। लेकिन जब नजर पद (Designation) पर जाती है, तो वह कोई सरकारी पद नहीं, बल्कि “Distt. Incharge – Trade Wing (AAP) – Jalandhar Rural” लिखा मिलता है। बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी सत्ताधारी दल का पदाधिकारी होना किसी व्यक्ति को यह अधिकार दे देता है कि वह राष्ट्रीय प्रतीकों को अपनी निजी पहचान के रूप में इस्तेमाल करे? क्या यह जनता और प्रशासन को भ्रमित करने की एक सोची-समीझी साजिश नहीं है?

कमीशनखोरी और दबाव की आशंका: प्रशासन पर सीधा प्रहार
गुप्त सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, इन कार्डों का उपयोग सरकारी दफ्तरों में अधिकारियों पर ‘अघोषित दबाव’ बनाने के लिए किया जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि ‘सरकारी लुक’ वाले इन कार्डों के जरिए फाइलों को रसूख के दम पर आगे बढ़ाया जाता है और शाम को ‘कमीशन’ का लेन-देन होता है। यदि ये आरोप सच हैं, तो यह राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की निष्पक्षता पर एक बड़ा हमला है।
कानून की नजर में यह ‘अपराध’ है (संभावित धाराएं)
भारतीय कानून के अनुसार राज्य चिन्ह का गलत इस्तेमाल एक गंभीर संज्ञेय अपराध है:
- State Emblem of India Act, 2005: इसकी धारा 3 और 7 के तहत राज्य चिन्ह का अनधिकृत उपयोग करने पर 2 साल तक की कैद या भारी जुर्माने का प्रावधान है।
- भारतीय न्याय संहिता (BNS): सरकारी कर्मचारी होने का ढोंग करना (Impersonation), धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज बनाने (BNS की संबंधित धाराएं) के तहत 2 से 7 साल तक की सजा हो सकती है।
वो सवाल, जिनका जवाब नकोदर की जनता चाहती है:
- क्या किसी पार्टी विंग के प्रभारी को राष्ट्रीय प्रतीक ‘अशोक स्तंभ’ इस्तेमाल करने की कानूनी अनुमति है?
- यदि यह कार्ड आधिकारिक नहीं है, तो इस पर “Govt. of Punjab” लिखकर किसे धोखा दिया जा रहा है?
- क्या नकोदर के अधिकारी ऐसे ‘प्रभावशाली’ कार्डों को देखकर कानून को ताक पर रख रहे हैं?
- अब तक कितनी सिफारिशें और फाइलें इस ‘तथाकथित सरकारी’ कार्ड के दम पर निपटाई गई हैं?
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
यह मामला केवल एक विजिटिंग कार्ड का नहीं, बल्कि संवैधानिक नैतिकता का है। स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि:
- कार्ड की छपाई और इसके वितरण की फोरेंसिक जांच हो।
- राज्य चिन्ह का अपमान करने वालों के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज की जाए।
- प्रशासन स्पष्ट करे कि क्या किसी राजनीतिक पदाधिकारी के पास सरकारी शक्तियां निहित हैं?
निष्कर्ष: अगर आज इस ‘कार्ड कल्चर’ पर लगाम नहीं कसी गई, तो कल हर गली में ‘सरकारी चिन्ह’ वाले निजी कार्ड घूमते नजर आएंगे। सवाल साफ है-कानून का राज चलेगा या सत्ता के रसूख वाले कार्डों का? नकोदर प्रशासन की चुप्पी कई अनकहे सवालों को जन्म दे रही है।
