भागदौड़ भरी इस आधुनिक जीवनशैली में तनाव, चिंता और नकारात्मकता इंसान की सबसे बड़ी दुश्मन बन गई हैं। अक्सर हम अपनी समस्याओं को इतना जटिल बना लेते हैं कि उनका समाधान खोजने के बजाय हम मानसिक अवसाद के दलदल में फंस जाते हैं। आयुर्वेद की प्रसिद्ध विशेषज्ञ डॉ. नेहा (BAMS) के अनुसार, मन और शरीर का गहरा संबंध है। यदि हमारा मन बीमार है, तो शरीर कभी स्वस्थ नहीं रह सकता।

क्रोनिक एंजायटी और तनाव बिगाड़ रहे हैं शरीर के तीनों दोष; मानसिक असंतुलन से उत्पन्न हो रहे हैं शारीरिक रोग, सकारात्मकता ही है असली औषधि: -डॉ. नेहा (BAMS)
आयुर्वेद का सिद्धांत: मन के विकार और दोषों का असंतुलन
डॉ. नेहा ने विस्तार से बताया कि हमारी सोच हमारे नर्वस सिस्टम और शारीरिक कार्यों को सीधे प्रभावित करती है। आयुर्वेद के अनुसार, जब हमारा मन असंतुलित होता है, तो शरीर के तीन मुख्य दोष-वात, पित्त और कफ-भी अपना संतुलन खो देते हैं:
- वात दोष (Chronic Anxiety): लंबे समय तक चिंता करने से वात दोष बिगड़ता है, जिससे शरीर में दर्द, अनिद्रा (Insomnia) और पाचन संबंधी विकार उत्पन्न होते हैं।
- पित्त दोष (Anger & Frustration): क्रोध और निराशा पित्त को कुपित करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप एसिडिटी, त्वचा रोग और शरीर में सूजन (Inflammation) जैसी समस्याएं होती हैं।
- कफ दोष (Depression & Attachment): अवसाद या किसी चीज़ से अत्यधिक लगाव कफ दोष को बढ़ाता है, जिससे वजन बढ़ना और रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) का कमजोर होना लाजमी है।
सकारात्मक सोच: समस्याओं को नजरअंदाज करना नहीं, समाधान खोजना
अक्सर लोग सकारात्मक सोच का गलत अर्थ निकालते हैं। डॉ. नेहा स्पष्ट करती हैं कि सकारात्मकता का अर्थ समस्याओं से आंखें मूंदना नहीं है, बल्कि नकारात्मक पक्ष के बजाय सकारात्मक नजरिए के साथ उसका प्रभावी समाधान खोजना है। सकारात्मक विचार हमारे नर्वस सिस्टम को शांत करते हैं, जिससे शरीर के अंग बेहतर ढंग से कार्य कर पाते हैं।
स्वस्थ जीवन के लिए डॉ. नेहा के 4 सूत्र
मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बहाल करने के लिए डॉ. नेहा ने निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:
- दिन की शुरुआत: सुबह उठते ही सकारात्मक विचार लाएं और आध्यात्मिक जुड़ाव (भगवान का नाम) के साथ दिन शुरू करें।
- नजरिया बदलें: हर स्थिति को नकारात्मक रूप में लेने के बजाय उसमें छिपे अवसर या सकारात्मक पहलू को देखें।
- स्वस्थ दिनचर्या: एक व्यवस्थित रूटीन का पालन करें जो शरीर को अनुशासन में रखे।
- व्यायाम और योग: शारीरिक सक्रियता न केवल शरीर को लचीला बनाती है, बल्कि अत्यधिक तनाव को कम करने में भी सहायक होती है।
संपादकीय दृष्टिकोण: डॉ. नेहा की यह सलाह आज के ‘पैनिक मोड’ वाले समाज के लिए एक वेक-अप कॉल है। हम दवाओं के जरिए लक्षणों का इलाज तो कर रहे हैं, लेकिन बीमारी की असली जड़-‘हमारी सोच’-पर काम नहीं कर रहे। आशावादी विचार केवल भावनात्मक सहारा नहीं हैं, बल्कि यह एक जैविक (Biological) आवश्यकता है।

