चंडीगढ़: भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में चंडीगढ़ मेयर का चुनाव एक बेहद अनोखे और यादगार अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, चुनाव प्रभारी विनोद तावड़े, बीजेपी अध्यक्ष जतिंदर पाल मल्होत्रा और दिग्गज नेता संजय टंडन की सोची-समझी ‘गुगली’ के आगे आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पूरी तरह ढेर हो गई। चंडीगढ़ प्रशासन ने सभी पार्टियों की सहमति के बाद 29 जनवरी की तारीख तय की थी, लेकिन सदन के भीतर जो नजारा दिखा, उसने सत्ता के समीकरणों को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया। जहां बीजेपी के खेमे में आत्मविश्वास और खुशी की लहर थी, वहीं विपक्षी पार्षदों के चेहरे पर हार की शिकन साफ पढ़ी जा सकती थी।
विपक्षी गठबंधन का बिखराव और सदन की हलचल
बीते चुनावों के उलट, इस बार कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच कोई गठबंधन नहीं था। दोनों पार्टियों ने एक-दूसरे से दूरियां बना रखी थीं, जिसका सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी को मिला। जैसे ही पीठासीन अधिकारी (प्रोजाइडिंग ऑफिसर) ने चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने का संबोधन किया, पूरे सदन में हलचल तेज हो गई। चुनाव की पद्धति बेहद पारदर्शी और अनोखी रखी गई थी, जिसने जोड़-तोड़ की गुंजाइश को न्यूनतम कर दिया।
पारदर्शी मतदान और चुनावी नतीजे
पीठासीन अधिकारी ने एक-एक पार्षद को बुलाकर हाथ ऊपर उठाने और अपने पसंदीदा उम्मीदवार का नाम पुकारने का निर्देश दिया। इस खुली मतदान प्रक्रिया में बीजेपी ने प्रचंड जीत दर्ज की। मेयर पद के लिए बीजेपी के सौरभ जोशी को 18 वोट मिले, जबकि आप के योगेश ढींगरा को 11 और कांग्रेस के गुरप्रीत गाबी को मात्र 7 वोटों से संतोष करना पड़ा। सीनियर डिप्टी मेयर के पद पर बीजेपी के जसनप्रीत सिंह ने 18 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस के सचिन गालिव ने वॉकआउट कर दिया। डिप्टी मेयर पद पर भी बीजेपी की सुमन 18 वोट पाकर विजयी रहीं, वहीं कांग्रेस की निर्मला देवी ने भी सदन से वॉकआउट किया।
नवनिर्वाचित मेयर का संकल्प और मोदी लहर
अपनी जीत के बाद नवनिर्वाचित मेयर सौरभ जोशी ने इस सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र को दिया। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि वह दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी पार्षदों को साथ लेकर चलेंगे और शहर के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी जिम्मेदारी से काम करेंगे। उन्होंने शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने के लिए प्रशासन और पीठासीन अधिकारी का विशेष आभार व्यक्त किया।
बीजेपी मुख्यालय में जश्न का माहौल
बीजेपी ने एक बार फिर चंडीगढ़ की सियासत में अपना लोहा मनवा लिया है। इस बड़ी जीत के साथ ही बीजेपी कार्यालय में जश्न की तैयारियां शुरू हो गई हैं। कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ अपनी जीत का परचम लहराया। विपक्ष की आपसी फूट और बीजेपी की ठोस रणनीति ने इस चुनाव को एकतरफा मुकाबले में तब्दील कर दिया, जिससे आने वाले समय में चंडीगढ़ की राजनीति में बीजेपी का दबदबा और अधिक मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं।
संपादकीय टिप्पणी: चंडीगढ़ मेयर का यह चुनाव केवल एक स्थानीय निकाय की जीत नहीं है, बल्कि यह विपक्षी एकता के दावों की पोल खोलने वाला परिणाम है। बिना गठबंधन के मैदान में उतरी कांग्रेस और ‘आप’ की हार ने यह साबित कर दिया है कि रणनीतिक स्पष्टता के बिना बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे को मात देना कठिन है। हाथ उठाकर और नाम बोलकर वोट देने की ‘अनोखी’ प्रक्रिया ने न केवल पारदर्शिता को बढ़ावा दिया, बल्कि पार्षदों की वफादारी को भी सार्वजनिक पटल पर परख लिया। यह जीत आगामी नगर निगम की कार्यप्रणाली में बीजेपी के एजेंडे को मजबूती प्रदान करेगी।

