नांदेड: भारतीय रेलवे की सफाई व्यवस्था और यात्रियों की सुविधा के दावों की पोल उस वक्त खुल गई, जब हमारे पत्रकार ने नांदेड साहिब से जम्मू जाने वाली ट्रेन संख्या 12751 ‘हमसफर एक्सप्रेस’ की जमीनी हकीकत का जायजा लिया। हमसफर नाम सुनकर मन में एक सुखद सफर की कल्पना जागती है, लेकिन इस ट्रेन के भीतर कदम रखते ही यात्रियों का सामना भीषण गंदगी और बदइंतजामी से होता है। पूरे डिब्बे में कचरा बिखरा हुआ है और बदबू के कारण यात्रियों का सांस लेना तक दूभर हो चुका है, जिससे रेलवे के ‘स्वच्छ रेल-स्वच्छ भारत’ अभियान पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
टॉयलेट की बदहाली और बुजुर्गों की लाचारी
सफर के दौरान जब सीनियर सिटीजन इंद्रजीत कौर से बातचीत की गई, तो उन्होंने अपना दुख साझा करते हुए बताया कि ट्रेन के टॉयलेट जाने के बारे में सोचना भी डरावना हो गया है। विशेषकर कोच S3 की स्थिति अत्यंत दयनीय है, जहाँ टॉयलेट में पानी भरा हुआ है और वॉशबेसिन में हैंडवॉश के लिए लिक्विड सोप तक नदारद है। यात्रियों का कहना है कि भारी-भरकम किराया वसूलने के बावजूद रेलवे बुनियादी सुविधाएं देने में भी विफल साबित हो रहा है।
सेहत से खिलवाड़ करता खान-पान
ट्रेन के भीतर खान-पान की व्यवस्था भी बेहद शर्मनाक और असुरक्षित पाई गई। सामान बेचने वाले हॉकर साफ-सफाई के मानकों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। पत्रकार द्वारा देखा गया कि हॉकर खाद्य सामग्री के पास ही तंबाकू का सेवन कर रहे थे। सामान को ढकने का कोई प्रबंध नहीं था और हॉकर गंदे हाथों से ही खाना परोस रहे थे। बातचीत के दौरान हॉकरों के मुंह से तंबाकू के छींटे खाने पर गिरते दिखाई दिए, जो यात्रियों की सेहत के साथ सीधे तौर पर खिलवाड़ है।
शिकायत के बाद जागी रेलवे की नींद
इस अव्यवस्था को लेकर जब यात्रियों द्वारा ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई गई, तब कहीं जाकर रेलवे प्रशासन की नींद टूटी और टॉयलेट की सफाई की प्रक्रिया शुरू हुई। यात्रियों का कहना है कि सफाई एक निरंतर प्रक्रिया होनी चाहिए, न कि केवल शिकायतों के बाद की जाने वाली रस्म अदायगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से पुरजोर अपील की गई है कि वे इस ओर व्यक्तिगत रूप से ध्यान दें ताकि यात्रियों का सफर सुरक्षित और सुखद बन सके।
संपादकीय टिप्पणी: भारतीय रेलवे को देश की जीवनरेखा माना जाता है, लेकिन ‘हमसफर’ जैसी प्रीमियम ट्रेनों में इस तरह की अव्यवस्था रेलवे प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गहरा दाग है। केवल नई ट्रेनों की घोषणा करना काफी नहीं है, बल्कि मौजूदा ट्रेनों में मानवीय गरिमा के अनुरूप सफाई और शुद्ध भोजन सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। जब तक ऑनलाइन शिकायत के बिना कर्मचारी अपनी ड्यूटी नहीं करेंगे, तब तक यात्री सुविधाओं का ढांचा ऐसे ही चरमराता रहेगा। रेलवे को ठेका प्रणाली पर चल रही सफाई व्यवस्था की सख्त जवाबदेही तय करनी होगी।

