चंडीगढ़: चंडीगढ़ की आबोहवा में उड़ने वाले परिंदों के लिए एक नाम उम्मीद की किरण बनकर उभरा है-डॉक्टर प्रिंस मेहरा। शहर के ‘बर्डमैन’ के नाम से विख्यात प्रिंस मेहरा की निस्वार्थ सेवा को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। दी एबूलेश बोर्ड ऑफ दि स्टार अप शिक्षा फाउंडेशन, दिल्ली की ओर से उन्हें ‘डॉक्टरेट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है। यह उनके जीवन की छठी डॉक्टरेट उपाधि है, जो उनके उस अटूट संकल्प का प्रमाण है जिसे उन्होंने साल 2011 में बेजुबान पक्षियों की सेवा के लिए शुरू किया था।
बेजुबानों के लिए समर्पित एम्बुलेंस
डॉक्टर प्रिंस मेहरा का ‘बर्डमैन’ बनने का सफर किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। 2011 से वे अपनी अनूठी पक्षी एम्बुलेंस के जरिए शहर के कोने-कोने में सेवा दे रहे हैं। जहाँ लोग अक्सर सड़क किनारे पड़े घायल पक्षियों को अनदेखा कर देते हैं, वहीं प्रिंस मेहरा उन्हें अपनी एम्बुलेंस में लाकर उनका उपचार करते हैं। उनके सेवा भाव का आलम यह है कि वे न केवल जीवित पक्षियों को नया जीवन देते हैं, बल्कि मृत पक्षियों को भी वह सम्मान देते हैं जिसके वे हकदार हैं।
रिकॉर्ड्स के शिखर पर सेवा का जज्बा
प्रिंस मेहरा के नाम दर्ज आंकड़े उनकी तपस्या की गवाही देते हैं। 2011 से अब तक वे 1400 मृत पक्षियों का पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार कर चुके हैं और 1250 घायल पक्षियों का सफलतापूर्वक इलाज कर उन्हें खुले आसमान में आजाद कर चुके हैं। इस सेवा के चलते उनके नाम आज 74 वर्ल्ड रिकॉर्ड्स दर्ज हैं। उनकी उपलब्धियों की फेहरिस्त में 7 नेशनल और 14 इंटरनेशनल अवार्ड्स शामिल हैं। इतना ही नहीं, उनका नाम प्रतिष्ठित ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ सहित 200 से अधिक किताबों में दर्ज है और उन्हें अब तक 250 से अधिक पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
प्रशासन और निगम ने भी सराहा
प्रिंस मेहरा की निरंतर सेवाओं को देखते हुए सरकारी स्तर पर भी उन्हें समय-समय पर मान-सम्मान मिला है। चंडीगढ़ प्रशासन ने इसी वर्ष 26 जनवरी को उन्हें ‘स्टेट अवार्ड’ से नवाजा, जबकि म्युनिसिपल कॉरपोरेशन चंडीगढ़ ने 15 अगस्त को उनके योगदान की सराहना करते हुए उन्हें विशेष अवार्ड प्रदान किया। डॉक्टरेट की इस छठी उपाधि ने उनकी उपलब्धियों में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया है, जिससे शहर के पर्यावरण प्रेमियों में खुशी की लहर है।
संपादकीय टिप्पणी:
डॉक्टर प्रिंस मेहरा का व्यक्तित्व और उनके कार्य आधुनिक युग में मानवता और करुणा की दुर्लभ मिसाल हैं। एक ऐसे समय में जब शहरीकरण के कारण पक्षियों के प्राकृतिक आवास छिन रहे हैं, ‘बर्डमैन’ जैसे समर्पित लोग प्रकृति और मानव के बीच के संतुलन को बनाए रखने का कार्य कर रहे हैं। 1400 मृत पक्षियों का संस्कार करना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के प्रति गहरा सम्मान है। 74 वर्ल्ड रिकॉर्ड्स यह साबित करते हैं कि यदि जुनून नेक हो, तो दुनिया आपके कदमों में झुकती है। प्रिंस मेहरा को मिली यह डॉक्टरेट उपाधि उन सभी पर्यावरण योद्धाओं का सम्मान है जो चुपचाप धरती को बचाने में लगे हैं।
