चंडीगढ़: सिटी ब्यूटीफुल के नगर निगम चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे चुनावी प्रक्रिया को लेकर सस्पेंस गहराता जा रहा है। 29 जनवरी 2026 को होने वाले इन चुनावों के लिए प्रशासन और नगर निगम सचिवालय के अलग-अलग आदेशों ने पार्षदों और राजनीतिक दलों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। मुख्य विवाद इस बात पर है कि वोटिंग ‘हाथ खड़े’ करके होगी या ‘वन-बाय-वन’ (व्यक्तिगत मतदान) के जरिए।
दो अलग-अलग आदेश, एक बड़ी दुविधा
प्रशासनिक गलियारों में इस समय दो विरोधाभासी दस्तावेज चर्चा का विषय बने हुए हैं:
- प्रशासन का पक्ष: चंडीगढ़ के माननीय गवर्नर और प्रशासन ने पहले ही सार्वजनिक रूप से संकेत दिए थे कि पारदर्शिता के लिए इस बार चुनाव हाथ उठाकर कराए जाएंगे। 13 जनवरी 2026 को जारी अधिसूचना (संख्या MC/Secretary/2026/21) में भी इसी प्रक्रिया का उल्लेख किया गया था।
- निगम सचिव का पत्र: दूसरी ओर, नगर निगम के सचिव कार्यालय द्वारा जारी एक ताजा पत्र, जिसमें श्री रमनीक सिंह बेदी को प्रेसाइडिंग ऑफिसर नियुक्त किया गया है, उसमें चुनाव प्रक्रिया के लिए ‘वन-बाय-वन’ वोटिंग का जिक्र किया गया है।
सीनियर डिप्टी मेयर ने उठाए सवाल
इस विरोधाभास को देखते हुए सीनियर डिप्टी मेयर जसबीर सिंह बंटी ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने चंडीगढ़ के डिप्टी कमिश्नर (DC) को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। बंटी का तर्क है कि एक ही चुनाव के लिए दो अलग-अलग नियमों का हवाला देना लोकतंत्र की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि चुनाव से पहले एकरूपता सुनिश्चित की जाए ताकि मतदान के दिन किसी भी प्रकार के विवाद या हंगामे की स्थिति न बने।
लोकतंत्र की पारदर्शिता पर दांव
चंडीगढ़ नगर निगम के पिछले चुनावों के विवादों को देखते हुए इस बार की प्रक्रिया बेहद संवेदनशील है। जहाँ ‘हाथ उठाकर’ वोटिंग से क्रॉस-वोटिंग का डर खत्म होता है, वहीं ‘सीक्रेट बैलेट’ या ‘वन-बाय-वन’ वोटिंग को व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा माना जाता है। अब गेंद प्रशासन के पाले में है कि वह किस अधिसूचना को अंतिम मानता है।
संपादकीय दृष्टिकोण: चुनाव प्रक्रिया में स्पष्टता का अभाव न केवल भ्रम पैदा करता है, बल्कि यह कानूनी पेचीदगियों को भी जन्म दे सकता है। यदि समय रहते प्रशासन ने इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया, तो 29 जनवरी को सदन के भीतर जबरदस्त हंगामा देखने को मिल सकता है। पारदर्शिता केवल कहने में नहीं, बल्कि स्पष्ट नियमों में होनी चाहिए।

