चंडीगढ़: चंडीगढ़ की राजनीति में उस वक्त उबाल आ गया जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आम आदमी पार्टी (आप) के खिलाफ सरकारी तंत्र के दुरुपयोग और महिला सम्मान को ठेस पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाते हुए सड़कों पर उतरने का फैसला किया। सेक्टर-25 स्थित दैनिक भास्कर कार्यालय के पीछे भाजपा कार्यकर्ताओं ने ‘आप’ की कथित तानाशाही के विरोध में उग्र प्रदर्शन किया।
क्या है पूरा विवाद?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जतिंदर मल्होत्रा ने खुलासा किया कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है। उन्होंने बताया कि पार्षद सुमन और पूनम ने ‘आप’ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था, जिसके बाद से उन्हें लगातार डराया-धमकाया जा रहा था। जब वे किसी प्रलोभन में नहीं आईं, तो पार्षद सुमन की भाभी के खिलाफ एक मामूली आरोप (एक महीने की अधिक तनख्वाह लेने) के तहत उम्रकैद जैसी सख्त धाराओं में एफआईआर दर्ज कर दी गई।
पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
मल्होत्रा ने आरोप लगाया कि कानून की सरेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं:
- बिना वारंट गिरफ्तारी: रात 10 बजे केस दर्ज हुआ और सुबह 7 बजे पुलिस ने जबरन घर से उठा लिया।
- मर्यादा का उल्लंघन: गिरफ्तारी के समय न तो महिला पुलिसकर्मी मौजूद थीं और न ही नियमों का पालन किया गया। महिला को घसीटकर गाड़ी में डाला गया और अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया।
- राजनीतिक दबाव: भाजपा का कहना है कि यह सब ‘आप’ पार्षदों और चेयरमैन की शह पर किया गया है।
दिग्गज नेताओं ने भरी हुंकार
प्रदर्शन के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण सूद, संजय टंडन, ओमवीर भट्टी, सुभाष चावला और रविकांत ने शिरकत की। नेताओं ने कहा कि वे अपनी ‘बहन’ के सम्मान के लिए आखिरी दम तक लड़ेंगे। भाजपा ने इस मामले में 10 लोगों के खिलाफ जवाबी एफआईआर भी दर्ज कराई है।
संपादकीय दृष्टिकोण: लोकतंत्र में राजनीतिक विचारधारा बदलना हर निर्वाचित प्रतिनिधि का अधिकार है, लेकिन यदि इस कारण परिवार के सदस्यों को निशाना बनाया जाता है, तो यह प्रशासनिक नैतिकता पर बड़ा सवाल है। चंडीगढ़ पुलिस को इस मामले में निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि जनता का विश्वास बना रहे।

