चंडीगढ़: सिटी ब्यूटीफुल में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। पिछले कुछ दिनों से बढ़ रहे तापमान के बीच बीती रात से शुरू हुई तेज हवाओं और उसके बाद हुई रिमझिम बारिश ने शहर में एक बार फिर कड़ाके की ठंड की वापसी करा दी है। जो लोग गर्मी के जल्दी आने की आशंका से चिंतित थे, उन्हें इंद्र देवता की मेहरबानी ने फिर से स्वेटर और जैकेट निकालने पर मजबूर कर दिया है।
आम जनजीवन पर पड़ा भारी असर
सुबह जब शहरवासियों की आंखें खुलीं, तो बाहर भीषण सर्दी और बारिश का नजारा था। इसका सबसे ज्यादा असर उन पर पड़ा जिन्हें सुबह-सुबह घर से निकलना था:
- स्कूली बच्चे और कर्मचारी: बारिश के कारण स्कूल जाने वाले बच्चों और ड्यूटी पर जाने वाले कर्मचारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
- दिहाड़ीदार मजदूर: लगातार हो रही बारिश ने दिहाड़ी पर काम करने वाले लोगों को घरों में दुबकने पर मजबूर कर दिया, जिससे उनके कामकाज पर ब्रेक लग गया।
तूफान का तांडव: पेड़ गिरे, बिजली व्यवस्था चरमराई
बारिश के साथ चली तेज आंधी और तूफान ने शहर के बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचाया है। पेड़ों के गिरने से न केवल सड़कें बाधित हुईं, बल्कि बिजली विभाग को भी भारी क्षति हुई है।
- सेक्टर-30: यहां कई जगह पेड़-पौधे उखड़ कर सड़कों पर गिर गए, जिससे आवाजाही प्रभावित हुई। साथ ही सड़कों पर जलभराव के कारण राहगीरों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
- धनास-14 वेस्ट: इस इलाके में बिजली की तारों पर पेड़ गिरने की खबरें सामने आई हैं, जिससे कई घंटों तक बिजली आपूर्ति ठप रही।
मौसम विभाग का अलर्ट और वर्तमान स्थिति
मौसम विभाग की मानें तो इस बदलाव को लेकर पहले ही अलर्ट जारी कर दिया गया था। खबर लिखे जाने तक चंडीगढ़ और आसपास के इलाकों में बारिश का सिलसिला लगातार जारी है। बारिश और तेज हवाओं के कारण तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे आने वाले एक-दो दिनों तक ठंड का असर बरकरार रहने की संभावना है।
संपादकीय दृष्टिकोण: हालांकि यह बारिश फसलों के लिए कुछ हद तक फायदेमंद हो सकती है, लेकिन शहर के ड्रेनेज सिस्टम की पोल एक बार फिर खुल गई है। जलभराव और पेड़ों के गिरने की घटनाओं ने नगर निगम और बिजली विभाग की मानसून पूर्व तैयारियों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह गिरे हुए पेड़ों को हटाने और बिजली व्यवस्था बहाल करने में तेजी दिखाए।

