चंडीगढ़: शिशु निकेतन पब्लिक स्कूल, सेक्टर-43A के प्रांगण से शुरू हुई सेवा की यह लहर अब गाँवों की गलियों तक पहुँच चुकी है। 2 फरवरी से शुरू हुए इस सात दिवसीय एन.एस.एस. शिविर ने न केवल छात्रों के भीतर सामाजिक जिम्मेदारी का अहसास कराया है, बल्कि उन्हें समाज के बुनियादी ढाँचे से रूबरू होने का अवसर भी दिया है। यह शिविर महज एक किताबी अभ्यास नहीं, बल्कि धरातल पर बदलाव लाने की एक ठोस कोशिश के रूप में उभर रहा है, जहाँ हर स्वयंसेवक समाज के प्रति अपनी जवाबदेही तय करने के लिए तत्पर नजर आ रहा है।
सेवा के पथ पर बढ़ते कदम
शिविर के तीसरे दिन, यानी 3 फरवरी की सुबह स्वयंसेवकों के एक जत्थे ने स्कूल द्वारा गोद लिए गए गाँव इटावा की ओर रुख किया। “स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण” के नारे के साथ, इन युवाओं ने गाँव की आबोहवा में जागरूकता का संचार करने का बीड़ा उठाया। इस दौरान न केवल नारों और चर्चाओं का सहारा लिया गया, बल्कि स्वयंसेवकों ने स्वयं हाथों में झाड़ू थामकर यह संदेश दिया कि कोई भी कार्य छोटा नहीं होता और स्वच्छता ही स्वस्थ जीवन की पहली सीढ़ी है।
स्वच्छता के लिए सामूहिक श्रमदान
अभियान के दौरान गाँव इटावा की आंगनवाड़ी और स्थानीय डिस्पेंसरी परिसर को विशेष रूप से लक्षित किया गया। यहाँ लगभग 50 एन.एस.एस. स्वयंसेवकों ने मिलकर व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया। झाड़ियों की सफाई से लेकर कूड़े के निस्तारण तक, विद्यार्थियों की सक्रियता ने पूरे परिसर की सूरत बदल दी। इन सार्वजनिक स्थानों पर विद्यार्थियों का पसीना बहाना ग्रामीणों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना, जिससे उन्हें अपने आसपास के वातावरण को साफ रखने की नई ऊर्जा मिली।
मुख्य अतिथि ने बढ़ाया उत्साह
सुबह ठीक 10:30 बजे क्षेत्र के पार्षद श्री जसबीर सिंह बंटी ने कार्यक्रम में शिरकत की और स्वयंसेवकों के बीच पहुँचकर उनकी पीठ थपथपाई। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि युवा शक्ति ही समाज में वास्तविक परिवर्तन की वाहक है। पार्षद ने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वच्छता को मात्र एक अभियान न समझें, बल्कि इसे अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएँ ताकि देश और समाज का भविष्य सुरक्षित और स्वस्थ रह सके।
परिवर्तन की एक नई चेतना
इस पूरे अभियान का मूल उद्देश्य ग्रामीणों को स्वच्छता और स्वास्थ्य के अंतर्संबंधों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम के समापन पर स्थानीय ग्रामीणों और प्रतिनिधियों ने विद्यार्थियों की इस पहल को सराहा। विद्यार्थियों ने अपनी सक्रिय भूमिका से यह प्रमाणित कर दिया कि यदि युवा पीढ़ी ठान ले, तो समाज के सर्वांगीण विकास में वे सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ साबित हो सकते हैं। ग्रामीणों ने भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों को निरंतर आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
संपादकीय टिप्पणी:
शिक्षण संस्थानों द्वारा गाँवों को गोद लेना और एन.एस.एस. जैसे माध्यमों से विद्यार्थियों को सामुदायिक सेवा से जोड़ना आधुनिक शिक्षा पद्धति का एक सराहनीय पहलू है। इटावा में शिशु निकेतन के विद्यार्थियों द्वारा किया गया यह कार्य केवल सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीणों के मानस पटल पर स्वास्थ्य के प्रति एक स्थायी चेतना जागृत करने का प्रयास है। जब युवा विद्यार्थी डिस्पेंसरी और आंगनवाड़ी जैसे सार्वजनिक स्थानों पर श्रमदान करते हैं, तो वे समाज को यह संदेश देते हैं कि नागरिक सुविधाओं का रखरखाव केवल सरकार की नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसे शिविर युवाओं के चरित्र निर्माण में मील का पत्थर साबित होते हैं।

