चंडीगढ़: भारत के राजनीतिक इतिहास में चंडीगढ़ मेयर चुनाव अपनी विशिष्ट कार्यप्रणाली और नाटकीय घटनाक्रमों के लिए सदैव याद रखे जाएंगे, लेकिन चुनाव के ठीक एक हफ्ते के भीतर जो तस्वीर उभर कर सामने आई है, वह उससे भी अधिक प्रभावशाली है। नवनिर्वाचित मेयर सौरभ जोशी ने सत्ता के गलियारों से बाहर निकलकर सीधे जनमानस के बीच जाने का फैसला किया है। पदभार संभालते ही उन्होंने ‘जनता दरबार’ की जो नई परंपरा शुरू की है, उसने शहर के राजनीतिक और सामाजिक परिवेश में एक नई सकारात्मक ऊर्जा भर दी है।
सत्ता का विकेंद्रीकरण और जनता दरबार
मेयर सौरभ जोशी ने पद संभालते ही सक्रियता दिखाते हुए हर सप्ताह सोमवार को ‘जनता दरबार’ लगाने का निर्णय लिया है। इस अनूठी पहल के तहत मेयर स्वयं लोगों के बीच जाकर उनकी शिकायतों और समस्याओं को न केवल सुन रहे हैं, बल्कि उनके त्वरित समाधान के लिए ठोस आश्वासन भी दे रहे हैं। प्रशासन को जनता की दहलीज तक लाने की इस कोशिश को स्थानीय निवासियों का भरपूर आशीर्वाद मिल रहा है, जिससे चंडीगढ़ के भविष्य के विकास को लेकर एक नई उम्मीद जगी है।
युवा शक्ति ने किया अभिनंदन
मेयर की इस जन-हितैषी पहल और उनकी जीत के उत्साह में चंडीगढ़ युवा मोर्चा की टीम ने नगर निगम पहुंचकर नवनिर्वाचित नेतृत्व का अभिनंदन किया। युवा मोर्चा के सदस्यों ने मेयर सौरभ जोशी, सीनियर डिप्टी मेयर जसनप्रीत सिंह और डिप्टी मेयर श्रीमती सुमन शर्मा को गुलदस्ते भेंट कर अपनी शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर युवा मोर्चा की टीम से रामेश साहोर, अभे झा, दिग्विजय, प्रिया पासवान, शानू दूबे, मोनू, रितिक, सुखराज गिल, अदित्य, रविन्द्र राणा और कमल शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे।
संकल्प पत्र और भविष्य की राह
युवा मोर्चा की टीम का आभार व्यक्त करते हुए मेयर सौरभ जोशी ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता केवल पद का निर्वहन करना नहीं, बल्कि जनता की सेवा करना है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यह कुर्सी जनता की अमानत है और वह चंडीगढ़ के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर जनता के बीच रहकर काम करेंगे। मेयर के इस संकल्प ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आगामी समय में शहर का विकास बंद कमरों के बजाय जनता की राय और उनकी भागीदारी से तय होगा।
संपादकीय टिप्पणी:
मेयर सौरभ जोशी द्वारा कार्यकाल की शुरुआत में ही ‘जनता दरबार’ जैसी पहल करना चंडीगढ़ के स्थानीय शासन में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। अक्सर चुनावी जीत के बाद जनप्रतिनिधि और जनता के बीच की दूरी बढ़ जाती है, लेकिन हर सोमवार सीधे संवाद का निर्णय इस दूरी को पाटने का काम करेगा। मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर की यह त्रिमूर्ति यदि इसी समन्वय और जन-संपर्क के साथ आगे बढ़ती है, तो चंडीगढ़ न केवल स्वच्छता में बल्कि सुशासन में भी देश के लिए एक मॉडल पेश कर सकता है। युवाओं की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि शहर का नेतृत्व अब ऊर्जावान और जवाबदेह हाथों में है।
