चंडीगढ़ : दशमेश पिता गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों की लासानी शहादत को याद करते हुए चंडीगढ़ के सेक्टर-27सी की मार्केट में भक्ति और सेवा का अनूठा दृश्य देखने को मिला। मार्केट एसोसिएशन और स्थानीय दुकानदारों के साझा सहयोग से एक भव्य लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें हज़ारों की संख्या में राहगीरों ने साहिबजादों की शहादत को नमन करते हुए प्रसाद ग्रहण किया।
धूप से धुंध तक: मौसम ने बदली करवट, सेवादारों ने बढ़ाई रफ्तार
सुबह 9 बजे जब लंगर की शुरुआत हुई, तो खिली हुई धूप ने सेवादारों का स्वागत किया। लेकिन देखते ही देखते चंडीगढ़ के मौसम ने अचानक करवट ली। दोपहर होते-होते सूर्य देवता गहरी धुंध की चादर में छिप गए और शीतलहर ने शहर को अपनी चपेट में ले लिया। कड़ाके की इस ठंड में ठिठुरते राहगीरों के लिए सेक्टर-27सी का यह लंगर किसी बड़ी राहत से कम नहीं था।
मेनू में खास: सूप से लेकर कॉफी तक की व्यवस्था
आमतौर पर लंगर में चाय का वितरण होता है, लेकिन सेक्टर-27सी की मार्केट ने इस बार विशेष प्रबंध किए थे। ठंड को देखते हुए राहगीरों को निम्नलिखित व्यंजन परोसे गए:
- गरमा-गरम वेज सूप (ठंड से राहत देने के लिए विशेष आकर्षण)
- चाय और कॉफी
- ब्रेड पकौड़े और मिक्स पकौड़े
50 सेवादारों की टीम ने संभाला मोर्चा
मार्केट के लगभग 50 सेवादारों ने पूरी तन्मयता के साथ अपनी ड्यूटी निभाई। वहां मौजूद सेवादारों से बातचीत की, तो उन्होंने बताया:
“यह केवल भोजन का वितरण नहीं, बल्कि साहिबजादों की उस शहादत को दी जाने वाली एक छोटी सी श्रद्धांजलि है, जिन्होंने मानवता और धर्म के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। हम हर साल इसी उत्साह के साथ यह आयोजन करते हैं ताकि शहर से गुजरने वाला कोई भी व्यक्ति इस कड़ाके की ठंड में भूखा या परेशान न रहे।”
चंडीगढ़ की ‘लंगर परंपरा’
सेक्टर-27 ही नहीं, बल्कि शहीदी दिवस के अवसर पर आज चंडीगढ़ के लगभग हर सेक्टर और प्रमुख चौराहों पर लंगर के स्टाल लगे नजर आए। शहरवासियों की यह एकजुटता और सेवा भाव चंडीगढ़ की उस साझी संस्कृति को दर्शाती है, जहाँ धर्म और सेवा एक साथ चलते हैं।
संपादकीय टिप्पणी: छोटे साहिबजादों का बलिदान दुनिया के इतिहास की सबसे महान घटनाओं में से एक है। सेक्टर-27सी मार्केट जैसे सामूहिक प्रयास न केवल नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ते हैं, बल्कि समाज में आपसी भाईचारे का संदेश भी देते हैं।

