धनास: रात के करीब 10:00 बजे का वक्त था जब नामधारी मार्बल के पास सन्नाटे को चीरती हुई एक जोरदार टक्कर की आवाज गूंजी। डडूमाजरा पुल की तरफ से आ रही कार (HP 40 F 3933), जिसे मकान नंबर 3260 निवासी अक्षय चला रहा था, जैसे ही यू-टर्न लेकर धनास की ओर मुड़ने लगी, तभी सामने से मौत बनकर आई एक तेज रफ्तार जावा मोटरसाइकिल (CH 01 CL 6991) सीधे कार के पिछले दरवाजे से जा टकराई। टक्कर इतनी भयानक थी कि कार दूसरी दिशा में घूम गई और सड़क पर चीख-पुकार मच गई। इस मंजर को देखकर वहां सैर कर रहे लोग सहम गए और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।
लापरवाही की तेज रफ्तार और नशे का शक
हादसे के बाद मौके पर मौजूद चश्मदीदों ने बताया कि मोटरसाइकिल पर चार लड़के सवार थे जो अत्यधिक तेज गति में थे। लोगों का कहना है कि बाइक सवार लड़कों की हालत देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे उन्होंने नशा किया हुआ हो। टक्कर के बाद दो लड़कों को गंभीर चोटें आईं, जिन्हें सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पीसीआर ने सेक्टर 16 के अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों के अनुसार, घायल युवकों की टांगों में गहरी चोटें आई हैं और उनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
18 चालान और सिस्टम की सुस्ती
इस पूरी घटना में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि दुर्घटनाग्रस्त जावा मोटरसाइकिल के पहले से ही 18 चालान हो रखे थे। यह एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है कि इतनी बार नियमों का उल्लंघन करने के बावजूद पुलिस विभाग ने इस बाइक को जब्त क्यों नहीं किया? यदि समय रहते इस वाहन पर नकेल कसी गई होती, तो शायद आज यह हादसा टल सकता था। स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि पुलिस का सुस्त रवैया अपराधियों और नियम तोड़ने वालों के हौसले बुलंद कर रहा है।
खूनी मोड़ पर सुरक्षा की गुहार
धनास के निवासियों ने बताया कि इस विशेष यू-टर्न पर आए दिन एक्सीडेंट होते रहते हैं, जिससे इलाके में हर वक्त भय का माहौल बना रहता है। बार-बार हो रहे हादसों के बावजूद प्रशासन किसी ठोस समाधान की जगह शायद किसी बड़े जानी नुकसान का इंतजार कर रहा है। कॉलोनी वासियों ने पुरजोर मांग की है कि इस यू-टर्न पर तुरंत स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएं और सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाया जाए ताकि तेज रफ्तार और गलत प्रवृत्ति के लोगों पर लगाम लगाई जा सके।
संपादकीय टिप्पणी: धनास का यह सड़क हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि हमारे सिस्टम की खामियों का जीता-जागता प्रमाण है। जब एक ही वाहन के 18 चालान होने पर भी वह सड़कों पर बेखौफ दौड़ता है, तो कानून का खौफ खत्म होना लाजमी है। प्रशासन को केवल चालान काटने तक सीमित न रहकर सख्त जब्ती की कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही, ब्लैक स्पॉट्स और खतरनाक यू-टर्न्स पर बुनियादी ढांचे में सुधार करना अनिवार्य है, ताकि बेगुनाह लोग प्रशासनिक सुस्ती की भेंट न चढ़ें।
