चंडीगढ़: एडीजीपी वाई. पूरण सिंह की आत्महत्या को सात दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उनके परिवार ने पोस्टमॉर्टम कराने की अनुमति नहीं दी है। परिजन इस बात पर अडिग हैं कि जब तक डीजीपी गौरव यादव, डीजीपी कपूर और पूर्व एसपी नरेंद्र बिजारणिया की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक वे शव का पोस्टमॉर्टम नहीं होने देंगे। इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक रूप भी ले लिया है। देशभर से कई राज्यों के प्रतिनिधिमंडल एडीजीपी पूरण सिंह के परिजनों से मिलने उनके निवास सेक्टर-24, चंडीगढ़ पहुँचे और परिवार को भरोसा दिलाया कि इस कठिन समय में वे उनके साथ खड़े हैं।
इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान भी बुधवार को एडीजीपी पूरण सिंह के आवास पहुँचे। उन्होंने परिवार से मुलाकात कर कहा, “यह एक दुखद और संवेदनशील समय है, सरकार को निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए। हम परिवार के साथ खड़े हैं।” वहीं, विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी परिजनों से मिलने पहुँचे और शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच और न्याय सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि पुलिस तंत्र पर जनता का विश्वास कायम रहे।
राजनीतिक गलियारों में इस घटना को लेकर तीखी चर्चाएँ जारी हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मामले से जुड़े सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है और परिवार से लगातार संवाद बनाए रखा गया है। हालाँकि, मृतक अधिकारी के परिवार का कहना है कि जब तक “मुख्य दोषियों” पर कार्रवाई नहीं की जाती, वे न तो शव का अंतिम संस्कार करेंगे और न ही किसी सरकारी बयान को स्वीकार करेंगे।
अब देखना यह है कि क्या आने वाले दिनों में प्रशासन और सरकार परिवार की मांगों पर कोई ठोस कदम उठाती है या नहीं। फिलहाल, एडीजीपी पूरण सिंह की मौत का रहस्य और न्याय की मांग दोनों ही चर्चा के केंद्र बने हुए हैं।

