चंडीगढ़: डडूमाजरा कॉलोनी, जिसने शहर को तीन-तीन मेयर (कमलेश, बनारसी दास, राजेश कालिया और कुलदीप कुमार) दिए हैं, आज अपने ही ‘गंदगी के पहाड़’ और बदहाल बुनियादी ढांचे के तले दबकर रह गई है। वर्षों से खत्म न हो रहे कूड़े के इस ढेर ने न केवल पूरे इलाके को दुर्गंध से भर दिया है, बल्कि निवासियों के स्वास्थ्य पर भी एक घातक खतरा पैदा कर दिया है।
स्थानीय निवासियों की पुकार है कि कोई तो उन्हें इस ‘कूड़े के कलंक’ से मुक्ति दिलाए। डडूमाजरा के ऊपर लटके इस प्रदूषण के बादल के कारण लोग टीबी (ट्यूबरकुलोसिस), मलेरिया और डेंगू जैसी संक्रामक बीमारियों से जूझ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, हर घर-परिवार में कोई न कोई सदस्य संक्रमण का शिकार है, जो कॉलोनी में स्वास्थ्य संकट की भयावहता को दर्शाता है।
करोड़ों खर्च, नतीजा शून्य: प्राप्त जानकारी के अनुसार, कूड़े के निस्तारण के लिए एक कंपनी को करोड़ों रुपये पानी की तरह दिए जा रहे हैं, लेकिन कूड़ा खत्म करने की डेडलाइन बार-बार आगे सरकती जा रही है। शहर में हजारों वाहनों का आवागमन इसी रास्ते से होता है, लेकिन किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि को यह गंदगी नज़र नहीं आती। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने जैसे आँखें बंद कर ली हैं।
टूटी सड़कें और धार्मिक आस्था का अपमान: कूड़े के संकट के अलावा, डडूमाजरा की सड़कें पूरी तरह से टूट चुकी हैं, जहां हर कदम पर गड्ढों का सामना करना पड़ता है। सफाई व्यवस्था का हाल यह है कि डडूमाजरा से सेक्टर 38 स्थित सब्जी मंडी की ओर जाने वाले रास्ते पर हर जगह गंदगी के ढेर लगे हैं।
हद तो तब हो गई जब आस्था के केंद्रों की भी उपेक्षा हुई। सब्जी मंडी के सामने स्थित पीपल के वृक्ष के नीचे स्थापित देवी-देवताओं की मूर्तियाँ भी ज़मीन पर गिरी मिलीं और उसके आस-पास भी गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिसे स्थानीय लोग आस्था का घोर अपमान बता रहे हैं। सब्जी खरीदने आए राजकुमार नामक एक नागरिक ने बताया कि मच्छरों के आतंक से लोग बेहद परेशान हैं, जिससे मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है।
निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस गंभीर स्थिति पर तत्काल विशेष ध्यान दिया जाए और डडूमाजरा के लोगों को शुद्ध हवा और सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार दिलाया जाए।

