सनातन हिंदू परंपरा में मकर संक्रांति का पर्व आध्यात्मिक चेतना और दान-पुण्य का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। विश्व भर में रहने वाले सनातनी इस दिन को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं, क्योंकि इसी दिन भगवान सूर्य नारायण धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और ‘उत्तरायण’ होते हैं। शास्त्रों के अनुसार, मकर संक्रांति पर किए गए पुण्य कार्यों का फल अनंत गुना बढ़ जाता है।
सूर्य देव के उत्तरायण होने पर मिलेगा अक्षय पुण्य, एकादशी के संयोग के कारण दान के समय का रखें विशेष ध्यान; ज्योतिषगुरु ओ.पी. भारद्वाज का विशेष मार्गदर्शन
इस वर्ष मकर संक्रांति के पर्व पर एक विशेष धार्मिक संयोग बन रहा है, जिसे लेकर विशेषज्ञों ने दान की विधि में सावधानी बरतने की सलाह दी है।
एकादशी का संयोग: दान के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव
ज्योतिषगुरु ओ.पी. भारद्वाज (फाउंडर-फ्यूचर फेस पॉइंट) के अनुसार, इस बार मकर संक्रांति एकादशी तिथि के साथ आ रही है। शास्त्रों में एकादशी के दिन अन्न दान की मनाही होती है, इसलिए इस बार खिचड़ी और अन्य अनाज का दान संक्रांति के दिन करने के बजाय अगले दिन द्वादशी को करना श्रेष्ठ और शास्त्रसम्मत रहेगा।
मकर संक्रांति पर अक्षय पुण्य प्राप्ति के 5 अचूक मार्ग
- ब्रह्ममुहूर्त में पवित्र स्नान
मकर संक्रांति पर सूर्योदय से पूर्व गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र नदी में स्नान का विशेष महत्व है। यदि नदी उपलब्ध न हो, तो घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल, तिल और हल्दी मिलाकर स्नान करना चाहिए। मान्यता है कि यह स्नान संचित पापों का नाश करता है। - सूर्य नारायण की उपासना और अर्घ्य
स्नान के पश्चात तांबे के पात्र में जल लेकर उसमें लाल फूल, रोली, गुड़ और अक्षत मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। “ॐ सूर्याय नमः” और गायत्री मंत्र का जाप करने से स्वास्थ्य, तेज और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। - तिल और ऊनी वस्त्रों का दान
इस दिन तिल का दान सबसे श्रेष्ठ माना गया है। तिल-गुड़ के लड्डू या तिल के तेल का दान करने से यमलोक के कष्टों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही जरूरतमंदों को कंबल, लोई और अलाव के लिए लकड़ी का दान करना जीवन में सुख-शांति लाता है। - गौ-सेवा और जीव दया
सनातन परंपरा में गौ-सेवा को सर्वोपरि माना गया है। संक्रांति पर गाय को हरा चारा, गुड़ और आटे के पेड़े खिलाना समस्त देवताओं की कृपा प्राप्त करने का सरल मार्ग है। इसके अलावा पक्षियों को बाजरा और चींटियों को पंजीरी खिलाना भी अत्यंत फलदायी है। - पितृ तर्पण से मिलेगी पूर्वजों की प्रसन्नता
मकर संक्रांति पितरों को याद करने और उनके निमित्त तर्पण करने का भी पावन अवसर है। इस दिन किया गया पितृ तर्पण पितृदोष से मुक्ति दिलाता है और पूर्वजों का आशीर्वाद घर-परिवार पर बना रहता है।
विशेष सुझाव: दान का सदुपयोग सुनिश्चित करें
ज्योतिषगुरु ओ.पी. भारद्वाज जी का कहना है कि दान देते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि आपके द्वारा दी गई सामग्री का दुरुपयोग न हो। सुपात्र ब्राह्मणों, संतों और वास्तविक जरूरतमंदों को दिया गया दान ही इहलोक और परलोक को मंगलमयी बनाता है।

