फतेहगढ़ साहिब/चंडीगढ़ : दशमेश पिता सरबंस दानी गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों और माता गुजरी जी की अद्वितीय शहादत को समर्पित ‘शहीदी जोड़ मेले’ के अवसर पर आज दि चंडीगढ़ कश्यप राजपूत सभा का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल फतेहगढ़ साहिब पहुँचा। सभा के अध्यक्ष श्री कुलवंत सिंह की अगुवाई में पहुँचे इस जत्थे ने साहिबजादों की शहादत को नमन किया और मानवता की सेवा का संकल्प दोहराया।
बाबा मोतीराम मेहरा मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा भव्य स्वागत
चंडीगढ़ से पहुँचे सभा के सदस्यों का अमर शहीद बाबा मोतीराम मेहरा मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट, फतेहगढ़ साहिब के परिसर में भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान ट्रस्ट के अध्यक्ष और उनकी टीम ने चंडीगढ़ सभा के सेवा कार्यों की सराहना की। शहादत की विरासत को संजोने और समाज सेवा में योगदान के लिए ट्रस्ट की ओर से सभा के चेयरमैन श्री कुलवंत सिंह को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। उन्हें छोटे साहिबजादों की याद में एक गरिमामयी ‘स्मृति चिन्ह’ और साहस की प्रतीक ‘तलवार’ भेंट की गई।
इन गणमान्य सदस्यों ने दर्ज कराई उपस्थिति
इस धार्मिक यात्रा और श्रद्धांजलि कार्यक्रम में चेयरमैन कुलवंत सिंह के साथ समाज के कई प्रमुख चेहरे मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
- श्री विनोद कुमार बिट्टू
- श्री अशोक कुमार
- श्री कृष्ण कुमार
- श्री जितेंद्र
- डॉक्टर प्रिंस मेहरा
- श्री बलविंदर सिंह मुल्तानी
शहादत और सेवा का अनूठा रिश्ता
चेयरमैन कुलवंत सिंह ने इस मौके पर कहा कि बाबा मोतीराम मेहरा जी का बलिदान हमें सिखाता है कि कठिन समय में भी मानवता की सेवा कैसे की जाती है। साहिबजादों की शहादत दुनिया के इतिहास में बेमिसाल है और फतेहगढ़ साहिब की यह धरती हमें हर पल धर्म और सच्चाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
संपादकीय टिप्पणी: शहीदी जोड़ मेला केवल एक समागम नहीं, बल्कि हमारी गौरवशाली विरासत का जीवंत प्रमाण है। चंडीगढ़ कश्यप राजपूत सभा जैसे संगठनों की ऐसी भागीदारी युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और गौरवशाली इतिहास से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

