चंडीगढ़: चंडीगढ़ का अति-सुरक्षित माना जाने वाला सेक्टर 37 आज शाम उस वक्त दहल उठा, जब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रदेश मुख्यालय के ठीक बाहर एक जोरदार धमाका हुआ। शाम करीब 5 बजे हुए इस विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि बीजेपी ऑफिस की इमारत के साथ-साथ आसपास की बिल्डिंगें भी कांप गईं। धमाके की गूंज दूर-तक सुनाई दी, जिसके तुरंत बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग ने पूरे क्षेत्र को सील कर दिया है और सेक्टर 37 का यह हिस्सा अब एक अभेद्य पुलिस छावनी में तब्दील हो चुका है।
मौत को करीब से देख भागे सहमे कर्मचारी
धमाका जिस वक्त हुआ, बीजेपी ऑफिस के भीतर कॉल सेंटर में काम करने वाले कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर तैनात थे। कॉल सेंटर कर्मी हर्ष ने बताया कि विस्फोट इतना भयानक था कि एक पल के लिए किसी को कुछ समझ नहीं आया। हर्ष और उनके साथी जान बचाने के लिए बाहर की ओर भागे। हर्ष ने रुआंसे होते हुए बताया कि उन्होंने सुबह 9 बजे अपनी नई एक्टिवा पार्क की थी, जो इस धमाके में पूरी तरह डैमेज हो गई। हर्ष के अलावा एक और एक्टिवा और एक कार को भी इस विस्फोट में भारी नुकसान पहुंचा है।
सुरक्षा के दावों और नाकाबंदी पर सवालिया निशान
शहर में जगह-जगह पुलिस नाके और हाई-अलर्ट के दावों के बावजूद, सत्ताधारी दल के कार्यालय के बाहर इस तरह की घटना होना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान लगा रही है। सूत्रों की मानें तो यह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है और इसके पीछे देश को तोड़ने वाली ताकतों का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय निवासियों और प्रत्यक्षदर्शियों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि कड़ी सुरक्षा वाले शहर में विस्फोटक सामग्री इतनी करीब कैसे पहुंच गई।
फॉरेंसिक जांच और नीले पुर्जों का रहस्य
घटना की गंभीरता को देखते हुए चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी भी तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उच्चाधिकारियों से संपर्क साधा गया है और जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। घटनास्थल पर पहुंची फॉरेंसिक विभाग की टीम को सर्च ऑपरेशन के दौरान कुछ संदिग्ध नीले रंग के पुर्जे (Parts) मिले हैं, जिन्हें कब्जे में ले लिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन अवशेषों की जांच से ही धमाके में इस्तेमाल की गई तकनीक और सामग्री का खुलासा हो सकेगा।
खौफ के साये में जांच का दौर जारी
फिलहाल, पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और बीजेपी ऑफिस के बाहर आने-जाने वाले हर संदिग्ध वाहन की डिटेल निकाली जा रही है। पुलिस विभाग का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह कोई शरारत थी या कोई सुव्यवस्थित आतंकी हमला। तब तक के लिए शहर के अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों और राजनीतिक कार्यालयों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मेयर सौरभ जोशी ने जनता से शांति बनाए रखने और किसी भी संदिग्ध वस्तु की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की है।
संपादकीय टिप्पणी:
बीजेपी कार्यालय के बाहर हुआ यह धमाका चंडीगढ़ पुलिस और खुफिया तंत्र की एक बड़ी विफलता की ओर इशारा करता है। एक ऐसे समय में जब शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने का दावा किया जा रहा है, राजनीतिक मुख्यालय के बाहर विस्फोट होना न केवल कानून-व्यवस्था को चुनौती है, बल्कि नागरिक सुरक्षा के प्रति भी एक गंभीर चेतावनी है। फॉरेंसिक टीम को मिले ‘नीले पुर्जे’ किसी सोची-समझी साजिश के तकनीकी साक्ष्य हो सकते हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह इस मामले की तह तक जाए और यह सुनिश्चित करे कि शहर की शांति भंग करने वाली देश-विरोधी ताकतों को कड़ी से कड़ी सजा मिले, ताकि जनता का प्रशासन पर भरोसा बना रहे।
