चंडीगढ़: आस्था और लोक-संस्कृति का महापर्व छठ पूजा, मंगलवार को चंडीगढ़ के सेक्टर 42 स्थित न्यू लेक पर जनसैलाब के रूप में उमड़ा। पूर्वांचल समाज के लाखों श्रद्धालुओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर चार दिवसीय इस कठिन व्रत की शुरुआत की।
कौन हैं छठी मैया? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छठी मैया को देवी कात्यायनी का ही स्वरूप माना जाता है। वह भगवान भास्कर श्री ब्रह्मदेव मानस की पुत्री हैं। पूर्वांचल समिति के प्रधान प्रजेश कुमार गुप्ता ने बताया कि यह मान्यता है कि जब कोई शिशु जन्म लेता है, तो छठी मैया छह दिनों तक उसके साथ रहती हैं। व्रती संतान की दीर्घायु और खुशहाल जीवन की कामना से उनकी पूजा करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि छठी मैया संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी करती हैं और उनकी पूजा-अर्चना से गंभीर रोग भी ठीक हो जाते हैं। समिति के सेवादार रमेश चौधरी से मिली जानकारी के अनुसार, स्वयं माता सीता ने भी पुत्र प्राप्ति के लिए छठी मैया की पूजा की थी। एक अनोखी मान्यता यह भी है कि इस दिन यदि कोई ट्रांसजेंडर किसी महिला को फल दे, तो उसे संतान की प्राप्ति होती है।
चार दिवसीय कठिन व्रत: एक अन्य सेवादार ने छठ पर्व की चार दिवसीय प्रक्रिया की जानकारी दी:
- पहला दिन: लौकी (घीया) और चावल का सेवन बिना लहसुन, प्याज और नमक के किया जाता है।
- दूसरा दिन (खरना): इस दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद खीर और रोटी खाकर 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत होती है।
- तीसरा दिन: डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर, यह 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है, जिसमें बिना कुछ खाए-पिए उपवास किया जाता है।
- चौथा दिन: सूर्योदय के समय पूजा-पाठ करने के बाद व्रत खोला जाता है।
विदेशों तक पर्व की धूम: सेवादारों ने बताया कि विदेशों में भी पूर्वांचल के लोग इस पर्व को धूमधाम से मनाते हैं। चंडीगढ़ में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए समिति द्वारा ठहरने की विशेष व्यवस्था की गई थी। प्रसाद के रूप में देशी घी का उपयोग किया गया, जिसमें 8 क्विंटल दूध, एक ट्राली केले और लगभग 7-8 क्विंटल मिक्स पकौड़े का प्रसाद बांटा गया।
VIP उपस्थिति: इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं हिमाचल प्रदेश के सह प्रभारी संजय टंडन ने पूर्वांचल के लोगों को शुभकामनाएं दीं। उनके साथ राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र मल्होत्रा भी उपस्थित रहे।




मुनाफाखोरी पर सवाल
हालांकि, इस पावन अवसर पर कुछ दुकानदारों द्वारा मुनाफाखोरी की शिकायतें भी सामने आईं। सूत्रों के अनुसार, सेक्टर 26 के डोगरा करियाना स्टोर पर सुबह 120 रुपये में बिकने वाला बांस का टोकरा (सूप) शाम होते-होते 300 रुपये में बेचा गया, जिससे आम श्रद्धालुओं में रोष देखा गया।



