नकोदर: पंजाब फार्मेसी अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक मामले पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए भारतीय जनता पार्टी जालंधर देहाती के पूर्व जिला अध्यक्ष मनीष धीर ने आम आदमी पार्टी की सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह ताजा विवाद एक बार फिर राज्य में निष्पक्ष एवं सुरक्षित भर्ती परीक्षाएं कराने में सरकार की विफलता को उजागर करता है।
लीक का सच और हाई-टेक धांधली
मनीष धीर ने कहा कि 19 जुलाई को आयोजित 454 फार्मेसी अधिकारी पदों की भर्ती परीक्षा में लगभग 7,000 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रक्रिया से समझौता किया गया, क्योंकि परीक्षा केंद्र के अंदर से प्रश्नपत्र को स्कैन कर बाहर भेजा गया, वहां उसका समाधान किया गया और बाद में ब्लूटूथ आधारित उपकरणों के माध्यम से उत्तर अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए।
प्रशासनिक नाकामी और खुफिया अलर्ट की अनदेखी
मनीष धीर ने कहा कि यह कोई एकाकी घटना नहीं है, बल्कि प्रशासनिक विफलता के बड़े पैटर्न का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि स्वयं रजिस्ट्रार ने स्वीकार किया था कि परीक्षा के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के संभावित दुरुपयोग को लेकर प्रशासन को पहले से खुफिया जानकारी प्राप्त थी। इसके बावजूद सरकार पर्याप्त संख्या में जैमर लगाने और प्रभावी सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने में विफल रही, जिससे उसकी तैयारी और जवाबदेही दोनों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
घोटालों की लंबी फेहरिस्त और सरकार की नीयत
मनीष धीर ने आगे आरोप लगाया कि फार्मेसी अधिकारी भर्ती परीक्षा विवाद आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल में सामने आया छठा बड़ा भर्ती या परीक्षा घोटाला है। उन्होंने नायब तहसीलदार भर्ती परीक्षा, पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की कक्षा 12 अंग्रेजी प्रश्नपत्र लीक, पीएसटीईटी विवाद, पंजाब अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड की भर्तियों में कथित अनियमितताओं तथा अन्य भर्ती संबंधी विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये घटनाएं लगातार सामने आ रही गंभीर प्रशासनिक विफलताओं का प्रमाण हैं।
दोहरे मापदंड और नैतिकता की मांग
सरकार के पारदर्शिता और ‘भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस’ के दावों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेता, जिनमें अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया भी शामिल हैं, पहले परीक्षा संबंधी विवादों के मामलों में अन्य सरकारों से इस्तीफे की मांग करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब नैतिक जिम्मेदारी का वही सिद्धांत पंजाब में भी लागू होना चाहिए।
युवा भविष्य की रक्षा और मंत्रियों से इस्तीफे की मांग
भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता की रक्षा करने में सरकार की लगातार विफलता के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए भाजपा ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस से तत्काल इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि पंजाब के युवाओं को ऐसी भर्ती प्रक्रिया मिलनी चाहिए जो केवल योग्यता, निष्पक्षता और पारदर्शिता पर आधारित हो तथा बार-बार सामने आने वाले पेपर लीक और नकल के आरोपों से पूरी तरह मुक्त हो।
संपादकीय टिप्पणी: भर्ती परीक्षाओं में बार-बार सामने आने वाले लीक और नकल के विवाद न केवल प्रशासनिक व्यवस्था की तकनीकी और सुरक्षात्मक कमियों को उजागर करते हैं, बल्कि लाखों मेहनती अभ्यर्थियों के भविष्य और विश्वास को भी गहरा धक्का पहुंचाते हैं। राज्य में पारदर्शी और सुदृढ़ परीक्षा प्रणाली स्थापित करना केवल राजनीतिक जवाबदेही का विषय नहीं है, बल्कि यह युवाओं के भरोसे को बहाल करने के लिए अनिवार्य कदम है।
