चंडीगढ़:
चाय की प्यालियों के बीच जब अपनी बात रखने का मौका मिलता है, तो बातचीत सिर्फ़ औपचारिकता नहीं रहती, वह मांगों की एक पूरी सूची बन जाती है। आज ट्रांसपोर्ट नगर के ट्रांसपोर्ट हाउस में राजस्थान समाज के प्रतिष्ठित लोगों ने भाजपा चंडीगढ़ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन के साथ चाय पर चर्चा बैठक का आयोजन किया।
पगड़ी और फूलों से भव्य स्वागत
बैठक में राजस्थान समाज के लोगों ने सबसे पहले संजय टंडन का भव्य स्वागत किया। इस मौके पर देवी सिंह और मनीष मारवाह ने पगड़ी पहनाकर, जबकि पवन शर्मा और संजीव ग्रोवर ने परना पहनाकर व फूलों का गुलदस्ता भेंट कर स्वागत किया।
अपने-अपने कार्यक्षेत्र की समस्याएं
इस मीटिंग में राजस्थान के लोगों ने अपने-अपने कार्यक्षेत्र में आने वाली समस्याओं के बारे में अवगत करवाया। एमपी शर्मा, नरेश, लोकेंद्र, कैलाश और पवन शर्मा ने अपने विस्तृत विचार रखे।
‘राजस्थान प्रकोष्ठ’ की मांग
पवन शर्मा ने कहा कि जैसे भाजपा में अलग-अलग राज्यों के प्रकोष्ठ बनाए गए हैं, वैसे ही राजस्थान प्रकोष्ठ भी होना चाहिए, जिससे उनके क्षेत्र की समस्याएं प्रकोष्ठ पदाधिकारी के माध्यम से टंडन तक पहुंचाई जा सकें। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा की कमेटी या शहर की कमेटियों में भी राजस्थान की भागीदारी होनी चाहिए।
चुनाव में हिस्सेदारी और त्योहारों की मांग
पवन शर्मा ने बताया कि चंडीगढ़ में राजस्थान के 8 से 10 हजार परिवार रहते हैं। उन्होंने मांग रखी कि नगर निगम चुनाव में भी अनुपात, योग्यता और पार्टी में दी गई सेवा को ध्यान में रखते हुए उस एरिया के लोकल निवासी को टिकट दी जानी चाहिए। साथ ही, जिस तरह अन्य राज्यों के त्योहार पार्टी स्तर पर मनाए जाते हैं, उसी तरह राजस्थान के त्योहार, जैसे गणगौर और तीज, भी मनाए जाने चाहिए।
टंडन का भरोसा
संजय टंडन ने सभी मांगों को गंभीरता से सुना और उन्हें पार्टी के हाई लेवल तक पहुंचाने का भरोसा दिया।
बड़ी संख्या में जुटे राजस्थान परिवार
इस मौके पर विजय कुमार, मोहनलाल, हरिप्रसाद, संजीव, रविंद्र सिंह, राजकुमार, अशोक भोमिया, निर्मल सिंह, ओंकार सिंह, अमित सिंह, सुरेंद्र शर्मा, कमल किशोर, ओम प्रकाश, सुमेरमल, इंदर सिंह, राधेश्याम, शुभम, संतोष वर्मा, सुनील और विजेंद्र सिंह सहित राजस्थान परिवार के बहुत से लोग मौजूद थे।
संपादकीय टिप्पणी: किसी भी शहर में बसे प्रवासी समुदाय का राजनीतिक दल से सीधे संवाद करना और अपनी हिस्सेदारी की मांग रखना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा है। राजस्थान समाज की मांगें, चाहे वे प्रकोष्ठ के गठन की हों, कमेटियों में भागीदारी की हों या सांस्कृतिक त्योहारों को पहचान दिलाने की, अपनी अलग पहचान और प्रतिनिधित्व की इच्छा को दर्शाती हैं। संजय टंडन का भरोसा एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि ये मांगें पार्टी के हाई लेवल तक पहुंचने के बाद ज़मीन पर कितनी उतरती हैं।
