नकोदर: किसी राजनीतिक यात्रा के स्वागत मंच पर जब रथ गुजर जाने के बाद जमीन पर सिर्फ बिखरे झंडे और रुलते गमछे ही बाकी रह जाएं, तो सवाल उठना लाजमी है। बीते दिनों भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से पंजाब में निकाली गई “नशा मुक्त पंजाब” यात्रा कई शहरों से होती हुई नकोदर पहुंची। इस यात्रा के दौरान एक तरफ जहां मर्यादा और सम्मान की अनूठी मिसाल देखने को मिली, वहीं दूसरी तरफ अपनों की ही घोर लापरवाही ने पार्टी की साख पर एक बड़ा चिंताजनक सवालिया निशान खड़ा कर दिया।
तिरंगे और फूलों के साथ भव्य स्वागत
यात्रा के नकोदर पहुंचने पर भारतीय एससी, बीसी, जनरल सेल, पंजाब के चेयरमैन श्री दविंदर कालेर ने तिरंगे लहराकर और फूलों की वर्षा के साथ मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल का भव्य स्वागत किया। स्वागत के बाद चेयरमैन कालेर और उनकी टीम ने मर्यादा का परिचय देते हुए अपने सभी बैनर, झंडे और गमछे सही ढंग से संभालकर रख लिए।
स्वागत मंच पर बिखरी बदइंतजामी
इसके ठीक उलट, डॉ. बी.आर. अंबेडकर चौक में बने मुख्य स्वागत मंच पर नजारा कुछ और ही था। जैसे ही यात्रा रथ वहां पहुंचा, स्वागत करने वाले तमाम स्थानीय नेता और कार्यकर्ता खुद रथ पर चढ़ने की होड़ में लग गए। रथ आगे बढ़ा, तो पीछे मंच पर पार्टी के जिन प्रतीकों, झंडों और पटकों (गमछों) को गले से लगाया गया था, उन्हें जमीन पर फेंक दिया गया। होर्डिंग्स और तख्तियां पैरों में रौंदी जा रही थीं।
तस्वीरें हुईं वायरल, पार्टी की किरकिरी
स्थानीय लोग इस लापरवाही को देखकर हैरान रह गए और देखते ही देखते सोशल मीडिया पर इन बिखरे हुए झंडों और गंदे होते गमछों की तस्वीरें वायरल हो गईं, जिससे पार्टी की भारी किरकिरी हुई।
चेयरमैन कालेर और परमजीत मेहरा ने बचाई लाज
जब वहां से चेयरमैन दविंदर कालेर गुजरे, तो इस नजारे को देख उनका दिल पसीज गया। उन्होंने तुरंत जमीन पर बिखरे पार्टी के झंडों और गमछों को ससम्मान खुद उठाया और अपने दफ्तर लेकर आए। इसी तरह वहां मौजूद परमजीत मेहरा नामक व्यक्ति ने भी सड़क पर फेंकी गई सभी तख्तियों को समेटा और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

हाईकमान के लिए सीख और चेतावनी
नकोदर की यह घटना बीजेपी के राष्ट्रीय और राज्य मुख्यालय सहित नकोदर के तमाम स्थानीय नेताओं के लिए एक बड़ी सीख और आंखें खोलने वाली चेतावनी बन गई है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि जो झंडा, जो निशान और जो नारा कार्यकर्ताओं को ऊर्जा देता है, क्या उसकी अहमियत सिर्फ नेताओं को चेहरा दिखाने और फोटो खिंचवाने तक ही सीमित है।
संपादकीय टिप्पणी: किसी भी राजनीतिक पार्टी के झंडे और गमछे सिर्फ कपड़े के टुकड़े नहीं होते, बल्कि कार्यकर्ताओं के जज़्बे और विचारधारा का प्रतीक होते हैं। रथ पर चढ़ने की होड़ में इन प्रतीकों का जमीन पर रुल जाना सिर्फ प्रबंधकीय खामी नहीं, बल्कि अनुशासन की कमी की ओर भी इशारा करता है। चेयरमैन कालेर और परमजीत मेहरा जैसे जागरूक कार्यकर्ताओं ने अपने स्तर पर स्थिति संभाली, लेकिन इस घटना से यह स्पष्ट है कि बड़े राजनीतिक आयोजनों के प्रबंधन में जिम्मेदारी और तालमेल की सख्त जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी किरकिरी से बचा जा सके।
