जालंधर / पंजाब:
जब ढाई साल की दूरी के बाद किसी एक साल की मासूम बच्ची को फिर से अपने पिता की गोद नसीब होती है, तो वह पल सिर्फ़ दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार का पुनर्जन्म बन जाता है। समाज में बिखरते परिवारों को जोड़ने और युवाओं को नशे की गर्त से निकालकर मुख्यधारा में लाने के उद्देश्य से कार्यरत क्राइम कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (वुमन सेल पंजाब) की टीम को एक और बड़ी सफलता मिली है। संगठन की पंजाब प्रेसिडेंट डॉ. हरमीत कौर के कुशल नेतृत्व और अथक प्रयासों से पिछले ढाई वर्षों से अलग रह रहे एक दंपत्ति और उनके परिवारों के बीच चल रही अनबन को समाप्त कर उन्हें पुनः एक कर दिया गया है।
नशे की लत ने बिखेरा था घर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिंदा फाटक निवासी युवती सिमरन और आनंद नगर निवासी युवक हनी का वैवाहिक जीवन पति की नशे की लत के कारण तनावपूर्ण दौर से गुजर रहा था। इस विवाद के चलते सिमरन पिछले ढाई साल से अपनी 1 वर्ष की मासूम बेटी के साथ अलग रहने को मजबूर थी। जब यह मामला क्राइम कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (वुमन सेल) के पास पहुँचा, तो डॉ. हरमीत कौर और उनकी टीम ने तुरंत संज्ञान लेते हुए मामले की मध्यस्थता शुरू की।
15 दिनों की गहन जाँच व पुष्टि के बाद बना समझौता
डॉ. हरमीत कौर की टीम ने लगातार 15 दिनों तक गहन मुआयना किया और इस बात की पूरी पुष्टि व तस्दीक की कि युवक हनी अब नशे से पूरी तरह दूर हो चुका है और सुधर चुका है। वर्तमान में हनी एक अच्छी नौकरी पर कार्यरत है और युवती सिमरन भी स्वावलंबी होकर जॉब कर रही है।
फिलीपींस से पहुंचे जीजा, दोनों पक्षों में बनी सहमति
दोनों पक्षों के संभ्रांत सदस्यों को एक मंच पर बिठाकर बातचीत कराई गई। इस बैठक में लड़की पक्ष से उसकी माताजी, भाई, स्वयं सिमरन तथा उसके मामा-मामी उपस्थित रहे। वहीं लड़के पक्ष से उसके मामाजी, मासी जी, बहन तथा विशेष रूप से फिलीपींस से आए उनके जीजाजी मौजूद रहे। सभी सदस्यों की सर्वसहमति और आपसी रजामंदी के बाद दोनों परिवारों के बीच के गिले-शिकवे पूरी तरह दूर कर दिए गए।
केस हुआ सफलतापूर्वक बंद, परिवार हुआ एक
इसके साथ ही इस केस को सफलतापूर्वक क्लोज (समाप्त) कर दिया गया। अब सिमरन, हनी, उनकी 1 साल की बच्ची और लड़के की माताजी सपरिवार एक ही घर में खुशी-खुशी रहेंगे।
“बिछड़ों को जोड़ना ही हमारा मुख्य लक्ष्य”
इस अवसर पर क्राइम कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (वुमन सेल पंजाब) की प्रेसिडेंट डॉ. हरमीत कौर ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनकी संस्था की मुख्य मुहिम “हमारा पंजाब हमारी जिम्मेदारी, हमारा यूथ हमारी जिम्मेदारी” है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य परिवारों को तोड़ना नहीं, बल्कि उन्हें जोड़ना है। उन्होंने कहा कि 15 दिनों के निरंतर प्रयास के बाद जब एक नन्ही बच्ची को उसके पिता का प्यार और एक परिवार को उनकी खुशियाँ वापस मिलती हैं, तो यही उनकी सबसे बड़ी कमाई होती है और वे आगे भी समाज हित में इसी प्रकार कार्य करते रहेंगे।
संपादकीय टिप्पणी: किसी बिखरे परिवार को फिर से जोड़ना किसी भी सामाजिक संस्था की सबसे संवेदनशील और जिम्मेदारी भरी भूमिका होती है, क्योंकि इसमें न सिर्फ़ दो वयस्कों के रिश्ते का सवाल होता है, बल्कि एक मासूम बच्चे के भविष्य का भी सवाल होता है। 15 दिनों तक नशामुक्ति की पुष्टि करके ही समझौता कराना इस बात का संकेत है कि संस्था ने जल्दबाज़ी नहीं, बल्कि सावधानी से कदम उठाया। हालांकि, असली परीक्षा अब शुरू होती है-यह देखना कि नशे से दूर रहने का यह संकल्प आने वाले समय में भी कायम रहता है या नहीं, ताकि यह पुनर्मिलन सिर्फ़ एक पल की खुशी न रहकर एक स्थायी नई शुरुआत बन सके।
