चंडीगढ़: 20 सितंबर 2026 को सेक्टर 17 का प्लाज़ा एक अलग ही रंग में दिखा। पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया के आह्वान पर यहाँ नशे के खिलाफ एक विशाल समारोह का आयोजन हुआ। कार्यक्रम संयोजक संजीव राणा के सौजन्य से संपन्न हुआ। शहर के निवासी और सभी धर्मों के जनप्रतिनिधि इसमें शामिल हुए और नशे के खिलाफ अपनी एकजुटता दिखाई।
जब सुर और संकीर्तन बने हथियार
समारोह में धार्मिक भजनों की मंडली ने अपने भजनों से लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। वहाँ संकीर्तन का आयोजन भी किया जा रहा था। नशे के खिलाफ यह लड़ाई यहाँ भक्ति और आस्था के सुरों के साथ लड़ी जा रही थी।
पुकार जो प्लाज़ा तक पहुँची
क्रिकेट खिलाड़ी चेतन शर्मा ने सोशल मीडिया पर जनता से अपील की कि वे इस महान कार्य के लिए सेक्टर 17 प्लाज़ा, चंडीगढ़ पहुँचें। उधर मठ मंदिर सेक्टर 20 की ओर से लाउडस्पीकर के जरिए लोगों का आह्वान किया जा रहा था कि वे नशे के खिलाफ एकजुटता दिखाने के लिए सेक्टर 17 प्लाज़ा पहुँचें। नतीजा यह रहा कि सारा प्लाज़ा खचाखच भरा हुआ था।
एक माँ की आँखों का दर्द
अपने अभिभाषण में राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया ने नशा मुक्त चंडीगढ़ और पंजाब का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि यह काम सबके सहयोग से ही हो सकता है और इसके लिए सबके साथ की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जब एक माँ का बेटा माँ की आँखों के सामने दम तोड़ता है, तो उस माँ को उसकी कमी पूरी ज़िंदगी सताती रहती है। नशे को खत्म करने के लिए उन्होंने सभी से साथ देने की अपील की।
शिकायत, जो बन सकती है ढाल
समारोह में पुलिस विभाग की ओर से भी घोषणा की गई। इसमें कहा गया कि यदि कोई व्यक्ति नशा कर रहा है, तो उसकी शिकायत पुलिस को दी जाए। इस तरह मंच की अपील को आम नागरिक की भागीदारी से जोड़ने की कोशिश की गई।
संपादकीय टिप्पणी: भीड़ जुटना किसी अभियान की पहली सीढ़ी है, मंज़िल नहीं। सेक्टर 17 के प्लाज़ा में दिखी एकजुटता इस बात का संकेत है कि नशे के सवाल पर शहर चुप नहीं रहना चाहता। राज्यपाल ने माँ के दर्द के ज़रिए जो बात रखी, वह आँकड़ों से ज्यादा गहरी चोट करती है, क्योंकि नशे की कीमत आखिरकार कोई न कोई परिवार चुकाता है। सभी धर्मों के जनप्रतिनिधियों का एक मंच पर आना बताता है कि यह लड़ाई किसी एक वर्ग की नहीं, पूरे समाज की है। पुलिस ने शिकायत का जो रास्ता खोला है, उसकी असली परीक्षा तब होगी जब लोग भरोसे के साथ आगे आएँ। एक दिन का समारोह तभी सार्थक होगा जब यह जोश रोज़मर्रा की सजगता में बदले।
