चंडीगढ़: ‘सिटी ब्यूटीफुल’ चंडीगढ़ का हर एक प्रमुख बाजार करवा चौथ के पावन अवसर पर दुल्हन की तरह सज उठा है और हर तरफ सुहागिनों की भारी भीड़ के कारण रौनक चरम पर पहुंच गई है। पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि की कामना लेकर रखा जाने वाला करवा चौथ का यह बेहद खास व्रत चंडीगढ़ शहर के कोने-कोने में पूरी श्रद्धा, परंपरा और असीम उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। सुबह सूरज निकलने से पहले सरगी खाने से शुरू हुआ यह भक्तिमय सफर रात को चांद के दीदार और पति के हाथों जल ग्रहण करने तक इसी उमंग के साथ जारी है।
मेहंदी के स्टालों और बाजारों में उमड़ा जनसैलाब
त्यौहार के चलते चंडीगढ़ के तमाम छोटे-बड़े बाजारों में खरीदारों की खचाखच भीड़ देखने को मिल रही है। खासतौर पर मेहंदी के स्टालों पर सुहागिनों का हुजूम उमड़ पड़ा है, जहां महिलाएं अपने हाथों पर पिया के नाम की मेहंदी सजाने के लिए घंटों अपनी बारी का इंतजार कर रही हैं। कपड़ों, गहनों, पूजा की सामग्री और श्रृंगार के सामान से दुकानें पूरी तरह पटी हुई हैं। शहर की इस अभूतपूर्व चमक-दमक और बाजारों की हलचल ने पूरे माहौल को उत्सव के अनोखे रंग में रंग दिया है।
कथा, पूजा और निर्जला उपवास का नियम
करवा चौथ का यह व्रत कड़े नियमों और गहरी आस्था का प्रतीक माना जाता है। सुहागिन महिलाएं सुबह तड़के सूरज निकलने से पहले भोजन और सरगी ग्रहण करती हैं, जिसके बाद पूरे दिन बिना जल की एक भी बूंद पिए पूर्ण निर्जला उपवास रखती हैं। शाम के समय महिलाएं एक साथ एकत्र होकर पारंपरिक तरीके से करवा चौथ की कथा सुनती हैं और सामूहिक पूजा-अर्चना करती हैं। पूरे दिन की कठिन तपस्या के बाद सभी महिलाओं को केवल रात के समय आसमान में चंद्रमा के निकलने का बेसब्री से इंतजार रहता है।
चांद का दीदार और पति के हाथों व्रत का पारण
रात को आसमान में चांद दिखाई देते ही व्रत के समापन की पावन प्रक्रिया शुरू होती है। सुहागिनें छलनी के माध्यम से पहले चंद्रमा का दर्शन करती हैं और फिर उसी छलनी में से अपने पति का चेहरा देखती हैं। इसके पश्चात पति अपने हाथों से पत्नी को जल पिलाकर और मिठाई खिलाकर उनका यह निर्जला व्रत खुलवाते हैं। पति के हाथों व्रत खोलने के बाद ही महिलाएं अन्न-जल ग्रहण करती हैं और परिवार के साथ खुशी-खुशी भोजन करती हैं।
संपादकीय टिप्पणी: करवा चौथ का त्यौहार केवल एक धार्मिक अनुष्ठान या उपवास मात्र नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी के रिश्ते की अटूट डोर, आपसी प्रेम, त्याग और समर्पण का जीवंत प्रतीक है। आधुनिकता के इस दौर में भी ‘सिटी ब्यूटीफुल’ चंडीगढ़ में जिस उत्साह के साथ सुहागिनों ने कड़े नियमों का पालन करते हुए निर्जला व्रत रखा और पारंपरिक रीति-रिवाजों को निभाया, वह हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की गहराई को दर्शाता है। बाजारों की यह चहल-पहल और पारिवारिक एकजुटता समाज में प्रेम और पवित्र रिश्तों के महत्व को और अधिक मजबूत करती है।
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चंडीगढ़ के बाजारों में करवा चौथ की भारी धूम, मेहंदी स्टालों पर जुटी सुहागिनों की भीड़ से चमका पूरा शहर!
✍️ By: Manjit Singh
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चंडीगढ़: ‘सिटी ब्यूटीफुल’ चंडीगढ़ का हर एक प्रमुख बाजार करवा चौथ के पावन अवसर पर दुल्हन की तरह सज उठा है और हर तरफ सुहागिनों की भारी भीड़ के कारण रौनक चरम पर पहुंच गई है। पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि की कामना लेकर रखा जाने वाला करवा चौथ का यह बेहद खास व्रत चंडीगढ़ शहर के कोने-कोने में पूरी श्रद्धा, परंपरा और असीम उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। सुबह सूरज निकलने से पहले सरगी खाने से शुरू हुआ यह भक्तिमय सफर रात को चांद के दीदार और पति के हाथों जल ग्रहण करने तक इसी उमंग के साथ जारी है।
त्यौहार के चलते चंडीगढ़ के तमाम छोटे-बड़े बाजारों में खरीदारों की खचाखच भीड़ देखने को मिल रही है। खासतौर पर मेहंदी के स्टालों पर सुहागिनों का हुजूम उमड़ पड़ा है, जहां महिलाएं अपने हाथों पर पिया के नाम की मेहंदी सजाने के लिए घंटों अपनी बारी का इंतजार कर रही हैं। कपड़ों, गहनों, पूजा की सामग्री और श्रृंगार के सामान से दुकानें पूरी तरह पटी हुई हैं। शहर की इस अभूतपूर्व चमक-दमक और बाजारों की हलचल ने पूरे माहौल को उत्सव के अनोखे रंग में रंग दिया है।
करवा चौथ का यह व्रत कड़े नियमों और गहरी आस्था का प्रतीक माना जाता है। सुहागिन महिलाएं सुबह तड़के सूरज निकलने से पहले भोजन और सरगी ग्रहण करती हैं, जिसके बाद पूरे दिन बिना जल की एक भी बूंद पिए पूर्ण निर्जला उपवास रखती हैं। शाम के समय महिलाएं एक साथ एकत्र होकर पारंपरिक तरीके से करवा चौथ की कथा सुनती हैं और सामूहिक पूजा-अर्चना करती हैं। पूरे दिन की कठिन तपस्या के बाद सभी महिलाओं को केवल रात के समय आसमान में चंद्रमा के निकलने का बेसब्री से इंतजार रहता है।
रात को आसमान में चांद दिखाई देते ही व्रत के समापन की पावन प्रक्रिया शुरू होती है। सुहागिनें छलनी के माध्यम से पहले चंद्रमा का दर्शन करती हैं और फिर उसी छलनी में से अपने पति का चेहरा देखती हैं। इसके पश्चात पति अपने हाथों से पत्नी को जल पिलाकर और मिठाई खिलाकर उनका यह निर्जला व्रत खुलवाते हैं। पति के हाथों व्रत खोलने के बाद ही महिलाएं अन्न-जल ग्रहण करती हैं और परिवार के साथ खुशी-खुशी भोजन करती हैं।
संपादकीय टिप्पणी: करवा चौथ का त्यौहार केवल एक धार्मिक अनुष्ठान या उपवास मात्र नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी के रिश्ते की अटूट डोर, आपसी प्रेम, त्याग और समर्पण का जीवंत प्रतीक है। आधुनिकता के इस दौर में भी ‘सिटी ब्यूटीफुल’ चंडीगढ़ में जिस उत्साह के साथ सुहागिनों ने कड़े नियमों का पालन करते हुए निर्जला व्रत रखा और पारंपरिक रीति-रिवाजों को निभाया, वह हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की गहराई को दर्शाता है। बाजारों की यह चहल-पहल और पारिवारिक एकजुटता समाज में प्रेम और पवित्र रिश्तों के महत्व को और अधिक मजबूत करती है।

