चंडीगढ़: हरिद्वार से कांवड़ लेकर चंडीगढ़ लौट रहे चार नाबालिग दोस्तों की गंगनहर में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई, जिससे पूरे इलाके की हर आंख नम हो गई है और बापूधाम में गहरा मातम छा गया है। माता-पिता से आशीर्वाद लेकर खुशी-खुशी घर से निकले ये चार दोस्त जब कांवड़ लेकर लौट रहे थे, तो रास्ते में गंगनहर में नहाने की इच्छा हुई। इस दौरान पहले एक दोस्त पानी में उतरा और डूबने लगा, जिसे बचाने के चक्कर में एक-एक कर तीनों दोस्त भी गहरे पानी में उतर गए। नहर में दलदल होने के कारण चारों दोस्त गहरे पानी में समाते चले गए, जिससे बापूधाम निवासी भारत (16), शिवांशु (16), नीतिश (16) (सभी सेक्टर 30) और रोहित (17) की मौत हो गई। ये सभी दोस्त साथ में पढ़ाई करते थे और गरीब परिवारों से ताल्लुक रखते थे।
एक दोस्त को बचाने में समा गए चारों मासूम
गंगनहर के तेज बहाव और दलदल ने चारों दोस्तों को संभलने का मौका तक नहीं दिया। एक साथी को पानी में जिंदगी की जंग लड़ते देख बाकी तीनों दोस्तों ने बिना अपनी जान की परवाह किए उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन गहरे पानी और दलदल के कारण चारों हादसे का शिकार हो गए। इस भयानक हादसे की खबर जैसे ही बापूधाम पहुंची, पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई। वार्ड नंबर 18 की पार्षद तरुण मेहता ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए इस दुखद घटना को लेकर गहरा शोक जताया और पीड़ित परिवारों के साथ खड़े रहकर सभी कार्य स्वयं अपनी देखरेख में करवाए।
प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने जताया शोक
जब इस भयानक हादसे के बारे में पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया को जानकारी मिली, तो वह तुरंत पीड़ित परिवारों से मिलने सेक्टर 30 पहुंचे। दुखी परिवारों से बातचीत करते हुए प्रशासक कटारिया ने उन्हें ढांढस बंधाया और आश्वासन दिया कि वह अधिकारियों से बातचीत कर जो भी संभव मदद होगी, करेंगे। राज्यपाल ने भावुक होते हुए कहा कि वे हमारे ही बच्चे हैं और सरकार इस दुखद घड़ी में पूरी तरह से पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है।
पीड़ित परिवारों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक मदद
वार्ड नंबर 18 की पार्षद तरुण मेहता के विशेष सहयोग से राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने दुख की इस घड़ी में पीड़ित परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये देने की घोषणा की है। सरकार की इस पहल से दुखी परिवारों को संबल देने की कोशिश की गई है, हालांकि इन मासूमों के जाने से परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़ कभी कम नहीं हो सकता।
संपादकीय टिप्पणी: हरिद्वार से कांवड़ लेकर लौट रहे चार गरीब परिवारों के मासूम बच्चों की गंगनहर में डूबने से हुई यह मौत अत्यंत हृदयविदारक और झकझोर देने वाली है। दोस्तों द्वारा एक-दूसरे की जान बचाने की कोशिश में अपनी जान गंवा देना आपसी स्नेह को तो दर्शाता है, लेकिन यह घटना धार्मिक यात्राओं के दौरान नहरों और नदियों के किनारे पुख्ता सुरक्षा प्रबंधों तथा जागरूकता की सख्त जरूरत को भी रेखांकित करती है। प्रशासन द्वारा पीड़ित परिवारों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देना सराहनीय कदम है, परंतु भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए खतरनाक घाटों पर चेतावनी बोर्ड, गोताखोरों की तैनाती और कड़े सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित किए जाने चाहिए।
