चंडीगढ़: भारतीय मजदूर संघ के प्रतिनिधियों ने चंडीगढ़ गवर्नमेंट ट्रांसपोर्ट वर्कर यूनियन (शेर पार्टी) के पदाधिकारियों के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय परिषद सदस्य संजय टंडन से विशेष मुलाकात की। सीटीयू (चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग) से निकाले गए 45 कर्मचारियों की सेवा बहाली और लंबे समय से पेंडिंग पड़े गंभीर मुद्दों को सुलझाने में दिए गए सहयोग के लिए प्रतिनिधिमंडल ने संजय टंडन का हृदय से आभार व्यक्त किया। वर्षों से अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे इन कर्मचारियों और उनके परिवारों के जीवन में इस पहल ने एक नई उम्मीद जगाई है।
रोजगार और परिवार की गरिमा का संवेदनशील विषय
मुलाकात के दौरान संजय टंडन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि रोजगार केवल आजीविका चलाने का साधन मात्र नहीं है, बल्कि यह कर्मचारी और उसके पूरे परिवार की गरिमा, सामाजिक सुरक्षा और भलाई से बहुत गहराई से जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावित कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान खोजने के लिए उचित और हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए ताकि ये 45 कर्मचारी जल्द अपनी ड्यूटी पर लौट सकें। उन्होंने कहा कि इन परिवारों ने लंबे समय तक अनिश्चितता और मानसिक तनाव का दौर देखा है, ऐसे में इनका रोजगार बहाल होना पूरे परिवार के लिए एक बहुत बड़ी राहत का सबब बनेगा।
संवाद, सहयोग और यूनियनों की अग्रणी भूमिका
इस दौरान संजय टंडन ने श्रम और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए सभी संबंधित पक्षों के बीच आपसी बातचीत और सहयोग को बेहद जरूरी बताया। उन्होंने कर्मचारियों की चिंताओं को प्रमुखता से उठाने में भारतीय मजदूर संघ और अन्य प्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका की दिल से सराहना की। इस मौके पर बीएमएस के पंजाब और चंडीगढ़ के संगठन सचिव निरंजन दास, विभाग प्रमुख बद्री कौशिक, अध्यक्ष बलविंदर सिंह, महासचिव जसवंत सिंह और अतिरिक्त महासचिव शिव मूरत यादव मौजूद रहे। वहीं शेर पार्टी प्रतिनिधिमंडल की ओर से अध्यक्ष आजाद सिंह, उपाध्यक्ष सतिंदर सिंह, महासचिव बलवीर सिंह और कैशियर गोविंद दहिया विशेष रूप से शामिल रहे।
संपादकीय टिप्पणी: सीटीयू से निकाले गए 45 कर्मचारियों की सेवा बहाली को लेकर भारतीय मजदूर संघ और संजय टंडन के बीच हुई यह वार्ता श्रम अधिकारों और मानवीय संवेदनाओं की दृष्टि से एक अत्यंत सराहनीय और महत्वपूर्ण कदम है। किसी भी कर्मचारी का रोजगार छीनना केवल उस व्यक्ति विशेष को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि उसके पूरे परिवार के आर्थिक और मानसिक संतुलन को हिलाकर रख देता है। राजनीतिक और सामाजिक नेतृत्व द्वारा ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर हस्तक्षेप करके बीच का रास्ता निकालना और उच्च अधिकारियों के साथ बातचीत के जरिए समाधान का मार्ग प्रशस्त करना यह साबित करता है कि संवाद से हर जटिल से जटिल श्रम समस्या को हल किया जा सकता है। यह पहल प्रभावित परिवारों को न केवल आजीविका का सहारा देगी, बल्कि समाज में उनके खोए हुए आत्मसम्मान को भी पुनः बहाल करेगी।
