चंडीगढ़: भाई और बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार आते ही शहर के मुख्य बाजार पूरी तरह गुलजार हो उठे हैं। रक्षाबंधन के त्योहार को लेकर चंडीगढ़ में लोगों द्वारा जमकर खरीदारी की गई। शहर के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों सेक्टर 22, सेक्टर 19 और सेक्टर 15 में लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिसके कारण कई स्थानों पर ट्रैफिक जाम की गंभीर स्थिति बन गई। सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं और कई लोग बेहद मशक्कत के साथ अपने वाहनों को भीड़ से बाहर निकालते हुए नजर आए। इस दौरान नगर निगम की ओर से राहत देते हुए पार्किंग की पर्ची काटी गई। पिछले काफी समय से बाजारों में व्यापार न के बराबर चल रहा था, लेकिन इस त्योहारी सीजन के आते ही दुकानदारों के चेहरों पर फिर से खुशियां लौट आई हैं और बाजारों में जमकर खरीदारी दर्ज की गई। कपड़ों और राखियों के साथ-साथ मिठाई की दुकानों पर भी ग्राहकों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिली।
इंद्र देव और इंद्राणी का ऐतिहासिक रक्षासूत्र
रक्षाबंधन के इस पवित्र त्योहार की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवताओं और असुरों के बीच हुए युद्ध में जब देवराज इंद्र पराजित होने लगे थे, तब उनकी पत्नी इंद्राणी ने गुरु बृहस्पति के कहे अनुसार देवराज इंद्र की कलाई पर एक पवित्र रक्षासूत्र बांधा था। इस रक्षासूत्र के प्रभाव से देवराज इंद्र को युद्ध में विजय प्राप्त हुई थी।
यमराज और यमुना के अमूल्य वरदान की कथा
इसी तरह एक अन्य पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता यमुना ने अपने भाई यमराज की कलाई पर रक्षासूत्र यानी राखी बांधी थी। बहन के इस असीम स्नेह से प्रसन्न होकर यमराज ने यमुना को यह वरदान दिया था कि जो भी बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधेगी, उसका भाई जीवन भर अपनी बहन की रक्षा करेगा।
संपादकीय टिप्पणी: रक्षाबंधन का त्योहार केवल एक धार्मिक रीति-रिवाज नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की सांस्कृतिक नींव और मानवीय रिश्तों की मिठास को और गहरा करता है। चंडीगढ़ के बाजारों में लंबे समय बाद लौटी यह रौनक न केवल शहर की आर्थिक गतिविधियों को गति देती है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि आधुनिकता के इस दौर में भी हमारी परंपराएं और पौराणिक मान्यताएं उतनी ही जीवंत हैं। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे बड़े त्योहारों के दौरान पार्किंग और यातायात प्रबंधन के लिए पुख्ता इंतजाम करे, ताकि श्रद्धा और खुशी के इस माहौल में आम जनता को असुविधा का सामना न करना पड़े।
