चंडीगढ़: कहने को तो यह चंडीगढ़ का ‘राम दरबार’ इलाका है, लेकिन यहां की जमीनी हकीकत किसी नर्क से कम नहीं है। विशेष रूप से राम दरबार फेज-2 की सड़कें इस कदर बदहाल हो चुकी हैं कि यहां से गुजरना किसी खतरनाक जंग को जीतने जैसा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण अब यहां के लोग अपनी जान ‘राम भरोसे’ छोड़कर घर से बाहर निकलने को मजबूर हैं।
निकलने से पहले 10 बार सोचते हैं लोग
फेज-2 की मुख्य सड़कों पर अब डामर कम और गहरे गड्ढे ज्यादा नजर आते हैं। स्थिति यह है कि स्थानीय लोग इन रास्तों का उपयोग करने से पहले 10 बार सोचते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि राम दरबार से बाहर जाने का और कोई सुगम रास्ता न होने के कारण उन्हें इसी ‘मौत के रास्ते’ से होकर गुजरना पड़ता है। शिकायतों के बावजूद समाधान न होने से जनता में भारी रोष है।
बारिश में कीचड़ का ‘स्नान’ और पलटती गाड़ियां
निवासियों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि बारिश के दिनों में तो स्थिति भयावह हो जाती है। सड़कों पर जलभराव और भारी कीचड़ के कारण पैदल चलने वालों का हाल ऐसा होता है जैसे वे कीचड़ में नहा कर आए हों। सबसे बड़ा खतरा दोपहिया और चौपहिया वाहनों के लिए है। गड्ढों के कारण आए दिन गाड़ियां अनियंत्रित होकर पलट रही हैं, जिससे न केवल वाहनों को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि किसी की जान जाने का खतरा भी हर वक्त बना रहता है।
प्रमुख मुद्दे और जनता की मांग:
- असुरक्षित मार्ग: टूटी सड़कों के कारण वाहन अनियंत्रित हो रहे हैं, जिससे आसपास की गाड़ियों और पैदल यात्रियों के लिए खतरा पैदा हो गया है।
- प्रशासनिक मौन: कई बार शिकायतें देने के बाद भी लोक निर्माण विभाग या संबंधित अथॉरिटी ने सुध नहीं ली है।
- विकास से कटा क्षेत्र: लोगों का कहना है कि जब पूरे शहर में सौंदर्यीकरण हो रहा है, तो राम दरबार को इस हाल में क्यों छोड़ दिया गया है?
निष्कर्ष: राम दरबार फेज-2 के लोगों ने चंडीगढ़ प्रशासन से गुहार लगाई है कि किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार करने के बजाय इन सड़कों की तत्काल मरम्मत कराई जाए। यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्थानीय निवासी उग्र प्रदर्शन को मजबूर होंगे।
www.feedfront.in
चंडीगढ़ का ‘राम दरबार’ या बदहाली का द्वार? फेज-2 की खस्ताहाल सड़कों पर जान जोखिम में डालकर चलने को मजबूर लोग
✍️ By: Manjit Singh
👁️ Trending Views till today 12:49 PM
चंडीगढ़: कहने को तो यह चंडीगढ़ का ‘राम दरबार’ इलाका है, लेकिन यहां की जमीनी हकीकत किसी नर्क से कम नहीं है। विशेष रूप से राम दरबार फेज-2 की सड़कें इस कदर बदहाल हो चुकी हैं कि यहां से गुजरना किसी खतरनाक जंग को जीतने जैसा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण अब यहां के लोग अपनी जान ‘राम भरोसे’ छोड़कर घर से बाहर निकलने को मजबूर हैं।
फेज-2 की मुख्य सड़कों पर अब डामर कम और गहरे गड्ढे ज्यादा नजर आते हैं। स्थिति यह है कि स्थानीय लोग इन रास्तों का उपयोग करने से पहले 10 बार सोचते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि राम दरबार से बाहर जाने का और कोई सुगम रास्ता न होने के कारण उन्हें इसी ‘मौत के रास्ते’ से होकर गुजरना पड़ता है। शिकायतों के बावजूद समाधान न होने से जनता में भारी रोष है।
निवासियों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि बारिश के दिनों में तो स्थिति भयावह हो जाती है। सड़कों पर जलभराव और भारी कीचड़ के कारण पैदल चलने वालों का हाल ऐसा होता है जैसे वे कीचड़ में नहा कर आए हों। सबसे बड़ा खतरा दोपहिया और चौपहिया वाहनों के लिए है। गड्ढों के कारण आए दिन गाड़ियां अनियंत्रित होकर पलट रही हैं, जिससे न केवल वाहनों को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि किसी की जान जाने का खतरा भी हर वक्त बना रहता है।
असुरक्षित मार्ग: टूटी सड़कों के कारण वाहन अनियंत्रित हो रहे हैं, जिससे आसपास की गाड़ियों और पैदल यात्रियों के लिए खतरा पैदा हो गया है। प्रशासनिक मौन: कई बार शिकायतें देने के बाद भी लोक निर्माण विभाग या संबंधित अथॉरिटी ने सुध नहीं ली है। विकास से कटा क्षेत्र: लोगों का कहना है कि जब पूरे शहर में सौंदर्यीकरण हो रहा है, तो राम दरबार को इस हाल में क्यों छोड़ दिया गया है?निष्कर्ष: राम दरबार फेज-2 के लोगों ने चंडीगढ़ प्रशासन से गुहार लगाई है कि किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार करने के बजाय इन सड़कों की तत्काल मरम्मत कराई जाए। यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्थानीय निवासी उग्र प्रदर्शन को मजबूर होंगे।

