चंडीगढ़: आज सुबह से ही सिटी ब्यूटीफुल की सड़कें और गलियां सतरंगी रंगों में सराबोर नजर आईं। होली के इस पावन पर्व पर बच्चों की टोलियां हाथों में रंग-बिरंगी पिचकारियां लिए घर से बाहर निकल पड़ीं। शहर के कोने-कोने में लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाकर गले मिलते दिखे, जिससे आपसी भाईचारे की एक अनुपम मिसाल पेश हुई। इस बार की होली केवल स्थानीय निवासियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारत की मिट्टी से जुड़े वे लोग भी इस जश्न का हिस्सा बने जो सात समंदर पार विदेशों में बस चुके हैं। अपनों के बीच होली मनाने की तड़प उन्हें वापस अपनी जड़ों की ओर खींच लाई।
स्मृतियों के गलियारों में फिर लौटे परदेसी
यूके से आए प्रिंस ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों से वे इस त्योहार की रौनक को बहुत याद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज इस पवित्र पर्व पर अपनों के साथ खूब आनंद लिया और रंगों के बीच पुरानी यादें ताजा हो गईं। वहीं यूके से ही आई ट्विंकल ने भी बातचीत के दौरान भावुक होते हुए कहा कि चंडीगढ़ की होली ने उनकी पुरानी स्मृतियों को जीवंत कर दिया है। शहर के विभिन्न हिस्सों में आयोजित होली मिलन समारोहों में विदेशी मेहमानों और स्थानीय लोगों ने मिलकर इस दिन को यादगार बना दिया।
सुरक्षा का घेरा और प्रशासन की मुस्तैदी
जहाँ एक ओर शहर खुशियों के रंगों में रंगा था, वहीं दूसरी ओर चंडीगढ़ प्रशासन और पुलिस विभाग शरारती तत्वों से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद बनाए रखने के लिए शहर के प्रमुख चौकों और संवेदनशील इलाकों में जगह-जगह नाके लगाए गए। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने जमीन पर कड़ा पहरा बिठाया ताकि हुड़दंगियों पर लगाम कसी जा सके।
अनुशासन की लक्ष्मण रेखा और एसएसपी की चेतावनी
चंडीगढ़ एसएसपी ने स्पष्ट रूप से लोगों से निवेदन किया कि होली का यह त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से मनाएं। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर शहर में 1100 पुलिस कर्मियों की विशेष ड्यूटी लगाई गई है। पुलिस विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि किसी ने शांति भंग करने की कोशिश की या शराब पीकर हुड़दंग मचाया, तो उनके खिलाफ सीधी एफआईआर दर्ज की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रंगों का यह त्योहार किसी के लिए परेशानी का कारण न बने।
संपादकीय टिप्पणी: होली का त्योहार केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है। चंडीगढ़ में विदेशी प्रवासियों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि अपनी जड़ों और परंपराओं का खिंचाव भौगोलिक सीमाओं से कहीं ऊपर है। हालांकि, उत्सव की आड़ में हुड़दंग और कानून का उल्लंघन समाज के लिए चिंता का विषय रहता है। प्रशासन द्वारा 1100 कर्मियों की तैनाती और सख्त चेतावनी एक सराहनीय कदम है, जो यह संदेश देता है कि व्यक्तिगत खुशी को सार्वजनिक शांति की कीमत पर हासिल नहीं किया जा सकता। सभ्य समाज में त्योहार की सार्थकता अनुशासन और आपसी सम्मान में ही निहित है।
