चंडीगढ़: महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर चारों ओर शिव के जयकारों की गूंज सुनाई दे रही थी, लेकिन सेक्टर 42 स्थित गांव इटावा का नजारा कुछ खास ही भक्तिमय था। श्रद्धा और सेवा के अटूट संगम के बीच गांव वासियों ने भगवान शिव के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करने के लिए एक भव्य लंगर का आयोजन किया। सुबह से ही हवा में छनते पकोड़ों की खुशबू और दूध के प्रसाद की मिठास ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्रद्धालु लंबी कतारों में लगकर पूरी श्रद्धा के साथ भोले बाबा का आशीर्वाद और प्रसाद ग्रहण करते नजर आए।
सेवा में शामिल हुए जन प्रतिनिधि
इस धार्मिक आयोजन की भव्यता तब और बढ़ गई जब सेक्टर 42 के काउंसलर और पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर जसवीर सिंह बंटी स्वयं सेवा करने के लिए पंडाल में पहुंचे। उन्होंने न केवल इस शुभ अवसर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, बल्कि सेवादारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रसाद वितरण में अपना योगदान भी दिया। एक जन प्रतिनिधि को अपने बीच सेवा करते देख गांव के लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला और सेवा का यह सिलसिला घंटों तक अनवरत चलता रहा।
गांव वासियों का आत्मीय सत्कार
इटावा गांव के निवासियों ने इस विशेष अवसर पर अपने प्रिय काउंसलर का गर्मजोशी से स्वागत किया। गांव के बुजुर्गों और युवाओं ने जसवीर सिंह बंटी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके साथ मिलकर सेवा करना पूरे गांव के लिए गर्व का विषय है। लोगों ने उनकी सादगी और धार्मिक कार्यों में उनकी निरंतर भागीदारी की सराहना की, जिससे इस पर्व की रौनक दोगुनी हो गई। गांव के हर कोने में एकता और भाईचारे की मिसाल पेश की गई।
भक्ति और समर्पण का समापन
जैसे-जैसे दिन ढलता गया, श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक बढ़ती गई। दूध और पकोड़ों के इस विशेष लंगर में समाज के हर वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और प्रसाद ग्रहण किया। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि समुदाय के बीच आपसी प्रेम और सेवा भावना को भी एक नई ऊंचाई दी। महाशिवरात्रि का यह उत्सव गांव इटावा की यादों में एक सुखद और प्रेरक अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है।
संपादकीय टिप्पणी: सामूहिक लंगर और सेवा के ऐसे आयोजन भारतीय संस्कृति की उस गहरी जड़ को दर्शाते हैं, जहाँ धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जन-सेवा का माध्यम बन जाता है। काउंसलर जसवीर सिंह बंटी जैसे जनप्रतिनिधियों का जनता के साथ मिलकर सेवा में उतरना, राजनीति और सामाजिक उत्तरदायित्व के बीच के फासले को कम करता है। ऐसे प्रयास न केवल धार्मिक सौहार्द को बढ़ावा देते हैं, बल्कि सामुदायिक एकजुटता को भी नई शक्ति प्रदान करते हैं।
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सेक्टर 42 के गांव इटावा में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई महाशिवरात्रि, काउंसलर जसवीर सिंह बंटी ने सेवा में निभाया अहम योगदान
✍️ By: Manjit Singh
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चंडीगढ़: महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर चारों ओर शिव के जयकारों की गूंज सुनाई दे रही थी, लेकिन सेक्टर 42 स्थित गांव इटावा का नजारा कुछ खास ही भक्तिमय था। श्रद्धा और सेवा के अटूट संगम के बीच गांव वासियों ने भगवान शिव के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करने के लिए एक भव्य लंगर का आयोजन किया। सुबह से ही हवा में छनते पकोड़ों की खुशबू और दूध के प्रसाद की मिठास ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्रद्धालु लंबी कतारों में लगकर पूरी श्रद्धा के साथ भोले बाबा का आशीर्वाद और प्रसाद ग्रहण करते नजर आए।
इस धार्मिक आयोजन की भव्यता तब और बढ़ गई जब सेक्टर 42 के काउंसलर और पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर जसवीर सिंह बंटी स्वयं सेवा करने के लिए पंडाल में पहुंचे। उन्होंने न केवल इस शुभ अवसर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, बल्कि सेवादारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रसाद वितरण में अपना योगदान भी दिया। एक जन प्रतिनिधि को अपने बीच सेवा करते देख गांव के लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला और सेवा का यह सिलसिला घंटों तक अनवरत चलता रहा।
इटावा गांव के निवासियों ने इस विशेष अवसर पर अपने प्रिय काउंसलर का गर्मजोशी से स्वागत किया। गांव के बुजुर्गों और युवाओं ने जसवीर सिंह बंटी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके साथ मिलकर सेवा करना पूरे गांव के लिए गर्व का विषय है। लोगों ने उनकी सादगी और धार्मिक कार्यों में उनकी निरंतर भागीदारी की सराहना की, जिससे इस पर्व की रौनक दोगुनी हो गई। गांव के हर कोने में एकता और भाईचारे की मिसाल पेश की गई।
जैसे-जैसे दिन ढलता गया, श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक बढ़ती गई। दूध और पकोड़ों के इस विशेष लंगर में समाज के हर वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और प्रसाद ग्रहण किया। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि समुदाय के बीच आपसी प्रेम और सेवा भावना को भी एक नई ऊंचाई दी। महाशिवरात्रि का यह उत्सव गांव इटावा की यादों में एक सुखद और प्रेरक अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है।
संपादकीय टिप्पणी: सामूहिक लंगर और सेवा के ऐसे आयोजन भारतीय संस्कृति की उस गहरी जड़ को दर्शाते हैं, जहाँ धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जन-सेवा का माध्यम बन जाता है। काउंसलर जसवीर सिंह बंटी जैसे जनप्रतिनिधियों का जनता के साथ मिलकर सेवा में उतरना, राजनीति और सामाजिक उत्तरदायित्व के बीच के फासले को कम करता है। ऐसे प्रयास न केवल धार्मिक सौहार्द को बढ़ावा देते हैं, बल्कि सामुदायिक एकजुटता को भी नई शक्ति प्रदान करते हैं।

