चंडीगढ़: चंडीगढ़ के सेक्टर 10 स्थित स्केटिंग रिंक में मार्शल आर्ट्स के जुनून और कौशल का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। 13 से 15 फरवरी, 2026 तक आयोजित 11वीं जीटीए कप ओपन नेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप 2025-26 के दौरान हवा में गूंजती किक की आवाजें और खिलाड़ियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। एमराल्ड मार्शल आर्ट्स अकादमी द्वारा आयोजित इस गरिमामयी प्रतियोगिता में देश भर के प्रतिभाशालियों ने हिस्सा लिया, लेकिन सबकी नजरें उस 9 साल के नन्हे योद्धा पर टिकी थीं जिसने अपनी फुर्ती से रिंग में समां बांध दिया।
रिंग में नन्हे चैंपियन का उदय
न्यू एंजल पब्लिक स्कूल, जीरकपुर में तीसरी कक्षा के छात्र हिमांशु मेहरा ने इस नेशनल चैंपियनशिप में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। सब-जूनियर (9 वर्ष) फ्रेशर श्रेणी के अंतर्गत -41 किलोग्राम भार वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हुए हिमांशु ने अनुशासन और तकनीक का बेजोड़ प्रदर्शन किया। बी.एस ताइक्वांडो अकादमी के इस होनहार खिलाड़ी ने अपने प्रतिद्वंदियों को पछाड़ते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा किया और अपनी सफलता की कहानी लिखी।
अनुशासन और कड़ी मेहनत का परिणाम
हिमांशु की इस उपलब्धि के पीछे उनकी अकादमी का कड़ा प्रशिक्षण और उनकी अपनी लगन साफ दिखाई दी। 11वीं जीटीए कप ओपन नेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतना न केवल हिमांशु के लिए एक व्यक्तिगत मील का पत्थर है, बल्कि यह उनकी अकादमी के कोचों के मार्गदर्शन की भी जीत है। इस जीत ने साबित कर दिया कि सही उम्र और सही दिशा में किया गया प्रयास राष्ट्रीय स्तर पर सफलता दिला सकता है।
गर्व और सराहना के पल
इस शानदार जीत के बाद स्कूल परिसर में खुशी की लहर दौड़ गई। न्यू एंजल पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल शरणजीत कौर ने हिमांशु मेहरा की इस ऐतिहासिक जीत पर उन्हें और उनके परिवार को बधाई दी। उन्होंने हिमांशु की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि न केवल स्कूल के लिए गौरव की बात है, बल्कि अन्य छात्रों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। गोल्ड मेडल के साथ हिमांशु अब उभरते हुए ताइक्वांडो सितारों की कतार में सबसे आगे खड़े हैं।
संपादकीय टिप्पणी: > हिमांशु मेहरा की यह जीत जमीनी स्तर पर खेलों के प्रति बढ़ते रुझान और कम उम्र में निखरती प्रतिभा का बेहतरीन उदाहरण है। 9 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतना यह दर्शाता है कि यदि शैक्षणिक संस्थानों और खेल अकादमियों का सही सहयोग मिले, तो आने वाले समय में देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर के मार्शल आर्ट्स खिलाड़ी मिल सकते हैं। यह सफलता केवल एक मेडल नहीं, बल्कि भविष्य के एक महान एथलीट के सफर की ठोस शुरुआत है।
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चंडीगढ़ के स्केटिंग रिंक में गूंजा हिमांशु का नाम, नेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में स्वर्णिम प्रहार से जीता सबका दिल
✍️ By: Manjit Singh
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चंडीगढ़: चंडीगढ़ के सेक्टर 10 स्थित स्केटिंग रिंक में मार्शल आर्ट्स के जुनून और कौशल का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। 13 से 15 फरवरी, 2026 तक आयोजित 11वीं जीटीए कप ओपन नेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप 2025-26 के दौरान हवा में गूंजती किक की आवाजें और खिलाड़ियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। एमराल्ड मार्शल आर्ट्स अकादमी द्वारा आयोजित इस गरिमामयी प्रतियोगिता में देश भर के प्रतिभाशालियों ने हिस्सा लिया, लेकिन सबकी नजरें उस 9 साल के नन्हे योद्धा पर टिकी थीं जिसने अपनी फुर्ती से रिंग में समां बांध दिया।
न्यू एंजल पब्लिक स्कूल, जीरकपुर में तीसरी कक्षा के छात्र हिमांशु मेहरा ने इस नेशनल चैंपियनशिप में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। सब-जूनियर (9 वर्ष) फ्रेशर श्रेणी के अंतर्गत -41 किलोग्राम भार वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हुए हिमांशु ने अनुशासन और तकनीक का बेजोड़ प्रदर्शन किया। बी.एस ताइक्वांडो अकादमी के इस होनहार खिलाड़ी ने अपने प्रतिद्वंदियों को पछाड़ते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा किया और अपनी सफलता की कहानी लिखी।
हिमांशु की इस उपलब्धि के पीछे उनकी अकादमी का कड़ा प्रशिक्षण और उनकी अपनी लगन साफ दिखाई दी। 11वीं जीटीए कप ओपन नेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतना न केवल हिमांशु के लिए एक व्यक्तिगत मील का पत्थर है, बल्कि यह उनकी अकादमी के कोचों के मार्गदर्शन की भी जीत है। इस जीत ने साबित कर दिया कि सही उम्र और सही दिशा में किया गया प्रयास राष्ट्रीय स्तर पर सफलता दिला सकता है।
इस शानदार जीत के बाद स्कूल परिसर में खुशी की लहर दौड़ गई। न्यू एंजल पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल शरणजीत कौर ने हिमांशु मेहरा की इस ऐतिहासिक जीत पर उन्हें और उनके परिवार को बधाई दी। उन्होंने हिमांशु की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि न केवल स्कूल के लिए गौरव की बात है, बल्कि अन्य छात्रों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। गोल्ड मेडल के साथ हिमांशु अब उभरते हुए ताइक्वांडो सितारों की कतार में सबसे आगे खड़े हैं।
संपादकीय टिप्पणी: > हिमांशु मेहरा की यह जीत जमीनी स्तर पर खेलों के प्रति बढ़ते रुझान और कम उम्र में निखरती प्रतिभा का बेहतरीन उदाहरण है। 9 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतना यह दर्शाता है कि यदि शैक्षणिक संस्थानों और खेल अकादमियों का सही सहयोग मिले, तो आने वाले समय में देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर के मार्शल आर्ट्स खिलाड़ी मिल सकते हैं। यह सफलता केवल एक मेडल नहीं, बल्कि भविष्य के एक महान एथलीट के सफर की ठोस शुरुआत है।

