चंडीगढ़: जन्माष्टमी के पावन अवसर पर चंडीगढ़ का कोना-कोना और हर एक मंदिर दुल्हन की तरह सजाया गया था। शहर के हर मंदिर में श्रद्धालु उमड़-उमड़ कर भगवान श्री कृष्ण की एक झलक पाने के लिए बेताब दिखाई दे रहे थे। सबसे ज्यादा श्रद्धालुओं का तांता सेक्टर 20 स्थित मठ मंदिर में लगा हुआ था। मंदिर में चारों ओर राधा-कृष्ण के नाम की पावन खुशबू फैली हुई थी और सभी श्रद्धालु भगवान श्री कृष्ण के गुणगान में पूरी तरह लीन दिखाई दे रहे थे।
श्री कृष्ण लीलाओं की चलंत झांकियां और वैष्णो देवी गुफा का अद्भुत रूप
सेक्टर 20 के मठ मंदिर में सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ने की मुख्य वजह वहां दिखाई गई भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं की चलती हुई दिव्य झलकियां थीं। इसके साथ ही मंदिर परिसर में वैष्णो देवी गुफा का भव्य रूप भी निर्मित किया गया था, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सड़क के दोनों तरफ हर तरह के सामान और स्वादिष्ट व्यंजनों की दुकानें सजी हुई थीं, जहां से श्रद्धालुओं और बच्चों ने जमकर खरीदारी की।
नन्हे-मुन्ने राधा-कृष्ण, बच्चों की मस्ती और खरीदारी का रंगीन माहौल
माता-पिता में भगवान श्री कृष्ण के प्रति इतना गहरा प्रेम देखा गया कि वे अपने छोटे-छोटे बच्चों को राधा और कृष्ण के मनमोहक रूप में तैयार करके महोत्सव में लेकर आए थे। बच्चों को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो साक्षात राधा और कृष्ण मंदिर से बाहर निकलकर अपने भक्तों के बीच उपस्थित होकर उन्हें दर्शन दे रहे हों। बच्चे इस धार्मिक माहौल में बेहद खुश नजर आए, जिन्होंने अपनी पसंद के खिलौने खरीदे और झूलों का जमकर आनंद लिया।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड की मुस्तैदी
जन्माष्टमी महोत्सव के दौरान चंडीगढ़ पुलिस द्वारा सुरक्षा के कड़े और व्यापक बंदोबस्त किए गए थे ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या अनहोनी न होने पाए। पुलिस बल हर मोड़ और जगह पर मुस्तैदी से तैनात था। इसके साथ ही किसी भी आपातकालीन स्थिति या अनहोनी से निपटने के लिए एम्बुलेंस और फायर स्टेशन की गाड़ियों का भी पूरा और पुख्ता बंदोबस्त किया गया था।
संपादकीय टिप्पणी: चंडीगढ़ के सेक्टर 20 स्थित मठ मंदिर में आयोजित जन्माष्टमी महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अपार जन-आस्था, भारतीय संस्कृति और सामाजिक सौहार्द का एक भव्य प्रतीक बनकर सामने आया है। वैष्णो देवी गुफा के अद्भुत रूप और श्री कृष्ण लीलाओं की चलंत झांकियों ने श्रद्धालुओं को एक अलौकिक आध्यात्मिक अनुभूति कराई। नन्हे-मुन्ने बच्चों का राधा-कृष्ण के स्वरूप में आगमन और परिजनों का यह समर्पण हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के निरंतर जीवंत रहने का प्रमाण है। इसके साथ ही चंडीगढ़ पुलिस, अग्निशमन विभाग और स्वास्थ्य सेवाओं की मुस्तैद तैयारियों ने यह साबित कर दिया कि कुशल प्रशासनिक व्यवस्था और नागरिक सहयोग से इतने विशाल जनसैलाब वाले आयोजनों को भी पूरी तरह सुरक्षित और सुव्यवस्थित रूप से संपन्न कराया जा सकता है।
