चंडीगढ़: बिना किसी शोर-शराबे के शहर के उस सबसे बड़े मंच पर सन्नाटा पसरा हुआ है, जहां कभी जनता की आवाज गूंजती थी। अप्रैल 2026 की आखिरी बैठक के बाद से चंडीगढ़ नगर निगम की कोई हाउस मीटिंग नहीं बुलाई गई है। वार्ड नंबर 24 के पार्षद और पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर जसबीर सिंह बंटी ने इस खामोशी पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की है। उनका साफ कहना है कि इस ठहराव की वजह से शहर के बुनियादी विकास कार्य और जनता से जुड़े बेहद जरूरी मुद्दे फाइलों में दबे पड़े हैं।
टूटती लोकतांत्रिक व्यवस्था
जसबीर सिंह बंटी का मानना है कि नगर निगम की हाउस मीटिंग महज एक सरकारी औपचारिकता नहीं, बल्कि हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था की वो आधारशिला है जहां बुनियादी सुविधाओं और जनहित के प्रस्तावों पर खुली चर्चा होती है। मगर पिछले कई महीनों से इस मंच का बंद होना शहरवासियों के लिए एक बड़ा झटका साबित हो रहा है। अनगिनत परियोजनाएं सिर्फ इसलिए अटकी हुई हैं क्योंकि उन्हें सदन की मंजूरी का इंतजार है और इसका सीधा नुकसान जनता भुगत रही है।
मेयर की बेबसी या प्रशासनिक विफलता?
हाल ही में ऋषिकेश के भीतर वर्तमान मेयर सौरभ जोशी द्वारा दिया गया एक बयान इस समय सबसे बड़ा विवाद बन चुका है। मेयर ने कहा था कि “चंडीगढ़ में मेयर से ज्यादा शक्तिशाली उसका चपरासी है।” जसबीर सिंह बंटी ने इस बयान को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक करार दिया है। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि अगर शहर के प्रथम नागरिक खुद को इतना बेबस और शक्तिहीन महसूस करते हैं कि अपने अधिकारों का इस्तेमाल भी नहीं कर पा रहे, तो उन्हें जनता के सामने आकर सच बताना चाहिए। बंटी ने मांग की है कि अगर मेयर अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में असमर्थ हैं, तो उन्हें नैतिक आधार पर अपने पद पर बने रहने के फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
फंड की कोई कमी नहीं, फिर भी रुका काम
अतीत में जब भी विकास कार्यों की रफ्तार धीमी होती थी, तो अक्सर वित्तीय संसाधनों की कमी का रोना रोया जाता था। मगर बंटी ने असलियत सामने रखते हुए साफ किया कि मौजूदा समय में नगर निगम के पास पर्याप्त फंड उपलब्ध हैं। पैसा होने के बावजूद हाउस मीटिंग न बुलाना और विकास कार्यों का इस तरह अधर में लटके रहना सीधे तौर पर प्रशासनिक विफलता को उजागर करता है। राजनीतिक और प्रशासनिक उलझनों की वजह से शहर का विकास प्रभावित हो रहा है।
चाबी अब प्रशासक के हाथ में
इस गहरे होते गतिरोध को तोड़ने के लिए जसबीर सिंह बंटी ने अब चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने प्रशासक से पुरजोर आग्रह किया है कि वे शहर के विकास और जनहित को सबसे ऊपर रखते हुए इस मामले में तुरंत दखल दें। बंटी ने मांग की है कि नगर निगम की हाउस मीटिंग जल्द से जल्द बुलाई जाए ताकि लंबित पड़े प्रस्तावों को मंजूरी मिल सके और रुके हुए पहियों को दोबारा गति दी जा सके, क्योंकि निगम का असली मकसद सिर्फ और सिर्फ नागरिकों को बेहतर सुविधाएं देना है।
संपादकीय टिप्पणी: चंडीगढ़ नगर निगम का मौजूदा संकट यह साफ करता है कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति और राजनीतिक जवाबदेही के बीच दूरी बढ़ती है, तो नुकसान सिर्फ आम जनता का होता है। लोकतंत्र में संवाद का रुकना विकास के पहिए को रोकने जैसा है। अगर खुद सर्वोच्च पद पर बैठा व्यक्ति अपनी शक्तियों को लेकर लाचारी दिखाएगा, तो पूरी व्यवस्था पर से जनता का भरोसा उठने लगेगा। प्रशासन को इस ठहराव को खत्म कर तुरंत लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बहाल करना चाहिए।
