चंडीगढ़: चंडीगढ़ के सीमावर्ती गांव धनास में स्थित 300 साल पुरानी ऐतिहासिक गुगा माड़ी पर जन्माष्टमी की अष्टमी के बाद नवमी के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं का अगाध जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस प्राचीन स्थान पर आसपास के 20 गांवों के लोग सदियों से नतमस्तक होने आते हैं, जहां आज भी इतिहास की अनमोल निशानियां जीवंत रूप में देखने को मिलती हैं। माड़ी के चारों ओर दिन भर भक्तिमय माहौल रहा और श्रद्धालुओं ने बड़ी श्रद्धा के साथ भगवान गुगा जी का आशीर्वाद प्राप्त किया।
300 साल पुराना इतिहास और प्राचीन विरासत की निशानियां
ग्राउंड ज़ीरो पर जब हमारे संवाददाता ने इस ऐतिहासिक स्थल का जायज़ा लिया, तो गांव धनास के 90 वर्षीय बुजुर्ग नानक सिंह ने इस जगह के गौरवशाली इतिहास पर से पर्दा उठाया। उन्होंने बताया कि यह गुगा माड़ी करीब 300 साल पुरानी है और यहां 20 गांवों के लोग पीढ़ी-दर-पीढ़ी नतमस्तक होने आते हैं। माड़ी की दीवारों के पास मौजूद विशेष पत्थर इसकी प्राचीनता की गवाही देते हैं, जबकि परिसर में स्थित ऐतिहासिक कुआं भी उसी दौर का बना हुआ है। एक अन्य चश्मदीद रहमदीन ने बताया कि माड़ी की प्राचीन दीवारें चूने और राख के विशेष मिश्रण से बनाई गई थीं, जो आज भी अपने समय की वास्तुकला को दर्शाती हैं।
सात पीढ़ियों से जारी सेवा और रात भर भजन-कीर्तन
इस पावन गद्दी की सेवा का इतिहास भी बेहद दिलचस्प है। बुजुर्ग भक्त लाभ सिंह ने करीब 50 सालों तक इस माड़ी की निस्वार्थ सेवा की, जिसके बाद यह ज़िम्मेदारी उनके भतीजे सुखमन सिंह को सौंपी गई। स्थानीय श्रद्धालुओं ने बताया कि उनके परिवार की लगभग 7वीं पीढ़ी लगातार इस स्थान की सेवा निभा रही है। परंपरा के अनुसार, भक्त इस पावन झंडे को लेकर अलग-अलग माड़ियों में ले जाते हैं और नवमी के दिन इसी मुख्य माड़ी पर विशाल उत्सव के साथ झंडा चढ़ाया जाता है। इस अवसर पर पूरी रात भजन-कीर्तन का दौर चलता है, जिससे समूचा परिसर अध्यात्म के रंग में रंग जाता है।
9 करोड़ के अमृत सरोवर के पास मेले जैसा माहौल
इस ऐतिहासिक माड़ी के आसपास पूरे दिन मेले जैसा रंगीन माहौल देखने को मिला। यह पावन स्थल सरकार द्वारा 9 करोड़ रुपये की लागत से बनाए जा रहे भव्य अमृत सरोवर के ठीक सामने स्थित है। माड़ी के पास स्थित एक प्राचीन विशाल पेड़ के नीचे गांव के बुजुर्ग बैठे नज़र आए, जो आपस में सुख-दुख साझा कर रहे थे। एक ओर जहां पुरानी परंपराओं का निर्वहन हो रहा था, वहीं दूसरी ओर युवाओं और बच्चों ने मेले में खाने-पीने की स्टॉल और झूलों का जमकर लुफ्त उठाया।
संपादकीय टिप्पणी: चंडीगढ़ के गांव धनास में 300 साल पुरानी गुगा माड़ी पर 20 गांवों के श्रद्धालुओं का यह एकत्रीकरण हमारी अटूट लोक-आस्था और सांस्कृतिक निरंतरता का एक सशक्त उदाहरण है। आधुनिकता के इस दौर में भी चूने और राख से बनी दीवारें, प्राचीन कुआं और सात पीढ़ियों से चली आ रही धार्मिक परंपराएं हमें हमारी जड़ों से जोड़ती हैं। 9 करोड़ रुपये के अमृत सरोवर प्रोजेक्ट के सामने स्थित यह ऐतिहासिक धरोहर न केवल एक धार्मिक केंद्र है, बल्कि यह हमारे ग्रामीण समाज की आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक पहचान का एक अमूल्य स्तंभ भी है, जिसे संजोकर रखना हम सभी का कर्तव्य है।
