चंडीगढ़: अधर्म पर धर्म की, असत्य पर सत्य की, अंधकार पर प्रकाश की और बुराई पर अच्छाई की विजय का त्योहार विजयदशमी धूमधाम से मनाया गया। सदियों से चली आ रही परंपरा को निभाते हुए युवा विकास रामलीला एवं दशहरा कमेटी धनास चंडीगढ़ की ओर से दशहरा का आयोजन बड़ी श्रद्धा के साथ किया गया।
जयघोष के साथ मैदान की ओर
बच्चे जय श्री राम का जयघोष करते हुए दशहरा ग्राउंड की ओर जा रहे थे, जबकि स्टेज पर रंगारंग कार्यक्रम चल रहे थे। हज़ारों की संख्या में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और भगवान श्री राम का आशीर्वाद लिया। वार्ड नंबर 14 और 15 धनास के लोगों ने इकट्ठा होकर दशहरे का आयोजन किया, और धनास के माननीय लोगों ने भी दशहरा ग्राउंड पहुँचकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। चंडीगढ़ भाजपा अध्यक्ष जतिंदर पाल मल्होत्रा ने भी मौजूद रहकर भगवान श्री राम का आशीर्वाद लिया।
शहर भर में रावण दहन
चंडीगढ़ की बात करें तो 35 से 42 स्थानों पर दशहरा और रावण दहन का आयोजन किया गया। शहर का सबसे ऊँचा रावण का पुतला सेक्टर 46 में 106 फीट का जलाया गया।
सुरक्षा और ट्रैफिक का पहरा
यातायात का ध्यान रखते हुए पुलिस विभाग की टीम तैनात रही और शहर की सुरक्षा व्यवस्था को तीन ज़ोन में बाँटा गया। पुलिस विभाग ने ट्रैफिक सुचारू रखने के लिए लोगों से सहयोग की अपील की और साइकिल ट्रैक, नो पार्किंग ज़ोन तथा पैदल रास्तों में वाहन खड़े न करने को कहा। नियमों का उल्लंघन करने पर वाहन को टो या क्लैंप किया जा सकता है। सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ की पाँच टुकड़ियाँ भी तैनात की गईं।
इस बार एक नई तस्वीर
इस बार एक और बात देखने को मिली कि नशे के ख़िलाफ़ भी पुतले जलाए गए।
संपादकीय टिप्पणी: परंपरा जब समय के सवालों से जुड़ जाती है, तब उसका संदेश और गहरा हो जाता है। रावण के साथ नशे के पुतले का जलना इसी ओर इशारा करता है कि बुराई की पहचान अब सिर्फ़ पौराणिक पात्र तक सीमित नहीं रही। हालाँकि प्रतीकात्मक दहन तभी सार्थक होगा, जब उसके बाद समाज में नशे के ख़िलाफ़ ठोस पहल दिखे। नशे के पुतले कहाँ और किसकी ओर से जलाए गए तथा आयोजन में उपस्थित लोगों की सटीक संख्या कितनी थी, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
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धनास में जयघोष से गूंजा दशहरा ग्राउंड, चंडीगढ़ में 106 फीट का रावण फूंका गया
✍️ By: Narinder Singh
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चंडीगढ़: अधर्म पर धर्म की, असत्य पर सत्य की, अंधकार पर प्रकाश की और बुराई पर अच्छाई की विजय का त्योहार विजयदशमी धूमधाम से मनाया गया। सदियों से चली आ रही परंपरा को निभाते हुए युवा विकास रामलीला एवं दशहरा कमेटी धनास चंडीगढ़ की ओर से दशहरा का आयोजन बड़ी श्रद्धा के साथ किया गया।
बच्चे जय श्री राम का जयघोष करते हुए दशहरा ग्राउंड की ओर जा रहे थे, जबकि स्टेज पर रंगारंग कार्यक्रम चल रहे थे। हज़ारों की संख्या में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और भगवान श्री राम का आशीर्वाद लिया। वार्ड नंबर 14 और 15 धनास के लोगों ने इकट्ठा होकर दशहरे का आयोजन किया, और धनास के माननीय लोगों ने भी दशहरा ग्राउंड पहुँचकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। चंडीगढ़ भाजपा अध्यक्ष जतिंदर पाल मल्होत्रा ने भी मौजूद रहकर भगवान श्री राम का आशीर्वाद लिया।
चंडीगढ़ की बात करें तो 35 से 42 स्थानों पर दशहरा और रावण दहन का आयोजन किया गया। शहर का सबसे ऊँचा रावण का पुतला सेक्टर 46 में 106 फीट का जलाया गया।
यातायात का ध्यान रखते हुए पुलिस विभाग की टीम तैनात रही और शहर की सुरक्षा व्यवस्था को तीन ज़ोन में बाँटा गया। पुलिस विभाग ने ट्रैफिक सुचारू रखने के लिए लोगों से सहयोग की अपील की और साइकिल ट्रैक, नो पार्किंग ज़ोन तथा पैदल रास्तों में वाहन खड़े न करने को कहा। नियमों का उल्लंघन करने पर वाहन को टो या क्लैंप किया जा सकता है। सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ की पाँच टुकड़ियाँ भी तैनात की गईं।
इस बार एक और बात देखने को मिली कि नशे के ख़िलाफ़ भी पुतले जलाए गए।
संपादकीय टिप्पणी: परंपरा जब समय के सवालों से जुड़ जाती है, तब उसका संदेश और गहरा हो जाता है। रावण के साथ नशे के पुतले का जलना इसी ओर इशारा करता है कि बुराई की पहचान अब सिर्फ़ पौराणिक पात्र तक सीमित नहीं रही। हालाँकि प्रतीकात्मक दहन तभी सार्थक होगा, जब उसके बाद समाज में नशे के ख़िलाफ़ ठोस पहल दिखे। नशे के पुतले कहाँ और किसकी ओर से जलाए गए तथा आयोजन में उपस्थित लोगों की सटीक संख्या कितनी थी, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
