चंडीगढ़:
जब सड़क पर दौड़ती बस अचानक धमाके के साथ थर्रा उठे, तो यात्रियों की सांसें थम जाना लाज़िमी है। बीते दिनों सेक्टर 16/17 को जोड़ने वाली रोज गार्डन लाइट प्वाइंट से पहले सीटीयू की चलती बस में जोरदार टायर फटने से धमाका हो गया। गनीमत रही कि किसी यात्री का नुकसान नहीं हुआ।
घटनास्थल पर 15-16 सवारियां मौजूद
हमारे पत्रकार ने जब घटनास्थल पर पहुंचकर देखा, उस वक़्त बस में 15-16 सवारियां मौजूद थीं और सवारियों को दूसरी बस में बैठाकर भेजा गया।
टायरों की खस्ताहाल सच्चाई आई सामने
पत्रकार ने देखा कि बस के टायरों की हालत बहुत ही खस्ता थी, अलग-अलग कंपनी के टायर अपना दर्द सांझा कर रहे थे। अब देखना होगा कि बस के रखरखाव की जिम्मेवारी कौन लेगा।
अन्य बसों के निरीक्षण में भी मिलीं खामियां
जब अलग-अलग बसों का निरीक्षण किया गया तो काफ़ी खामियां देखने को मिलीं।
“हादसा हो तो छोटे कर्मचारियों पर ही गिरती है गाज”
जब कोई हादसा हो जाए तो छोटे कर्मचारियों पर गाज गिर जाती है, जबकि बड़े अधिकारी साफ़ बचकर निकल जाते हैं।
संपादकीय टिप्पणी: सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था किसी भी शहर की रीढ़ होती है, और उसमें चलने वाले हज़ारों यात्रियों की जान सीधे तौर पर वाहनों के रखरखाव पर निर्भर करती है। खस्ताहाल टायरों के साथ बसों का सड़कों पर दौड़ना महज़ लापरवाही नहीं, बल्कि एक बड़े हादसे को न्यौता देने जैसा है। यह घटना इस बात की चेतावनी है कि अगर समय रहते बसों के नियमित और गंभीर निरीक्षण की व्यवस्था नहीं बनाई गई, तो आने वाले समय में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। ज़िम्मेदारी सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों पर थोपने की बजाय, प्रशासन को चाहिए कि वह बस बेड़े के रखरखाव की जवाबदेही ऊपर से नीचे तक तय करे, ताकि यात्रियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता न हो।
