नकोदर (जिला जालंधर): जालंधर जिले के नकोदर क्षेत्र में स्थित गांव शंकर और ढेरियां को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण लिंक रोड पिछले कई महीनों से एक गंभीर संकट का शिकार है। यह सड़क अब सिर्फ एक रास्ता नहीं, बल्कि गंदे पानी और मिट्टी से बनाए गए एक बांध के कारण ‘छोटे दरिया’ में बदल गई है। प्रशासन और संबंधित विभागों की उदासीनता ने स्थानीय लोगों के दैनिक जीवन को ‘दुखों के दरिया’ में तब्दील कर दिया है। यह मुद्दा सिर्फ एक खराब सड़क का नहीं, बल्कि यह पंजाब के उस सिस्टम की तस्वीर पेश करता है, जहां आम जनता की मुश्किलें प्रभावशाली लोगों के हितों के सामने बौनी हो जाती हैं।

सड़क बना तालाब, हर दिन की मुसीबत
इस संकट की जड़ गांव शंकर के घरों से निकलने वाले गंदे पानी में है, जो एक नाले के जरिए इसी लिंक रोड की तरफ बहता है। कुछ महीने पहले, अज्ञात व्यक्तियों ने सूरिंद्रा पब्लिक स्कूल के पास सड़क पर ही मिट्टी का एक बड़ा बांध बना दिया, जिससे पानी का प्राकृतिक निकास पूरी तरह से रुक गया। इसका नतीजा यह हुआ कि लगभग बीस मीटर तक सड़क पूरी तरह से पानी में डूब चुकी है। यह रुका हुआ पानी अब एक बदबूदार तालाब बन गया है, जिससे गुजरना हर किसी के लिए एक बड़ी मुसीबत है।
इस बंद रास्ते ने स्थानीय जीवन के हर पहलू को बुरी तरह प्रभावित किया है। स्कूली बच्चों को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, मरीजों को आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचने में कठिनाई हो रही है, और किसानों की फसलें मंडी तक नहीं पहुंच पा रही हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। सबसे बड़ी चिंता स्वास्थ्य को लेकर है, क्योंकि यह गंदा पानी डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के लिए मच्छरों का प्रजनन स्थल बन गया है।
अधिकारियों की लापरवाही और कानूनी उल्लंघन
यह स्थिति महीनों से बनी हुई है, लेकिन जिला प्रशासन, पीडब्ल्यूडी (PWD), जल संसाधन विभाग और पुलिस ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। लोगों का गुस्सा इस बात पर है कि अगर यह रास्ता किसी अधिकारी या नेता के घर की तरफ जाता, तो शायद एक ही दिन में यह समस्या हल हो जाती। यह चुप्पी साबित करती है कि सत्ता और पहुंच आम जनता की समस्याओं पर भारी पड़ती है।

यह मामला सिर्फ एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि कई गंभीर कानूनी उल्लंघनों का भी एक खुला केस है। भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत, किसी भी सार्वजनिक रास्ते पर पानी या गंदगी जमा करके जनता के लिए खतरा पैदा करना एक अपराध है। यह कृत्य धारा 268 (Public Nuisance), धारा 278 (Making atmosphere noxious), और धारा 336 (Act endangering life or personal safety) का सीधा उल्लंघन है।
इसके अलावा, अगर इस पानी में सीवरेज या घरेलू कचरा शामिल है, तो यह जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 का भी गंभीर उल्लंघन है। इस स्थिति में पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
जनता की स्पष्ट मांग और अंतिम चेतावनी
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, जनता और न्यूज़ मीडिया ने प्रशासन से कुछ स्पष्ट मांगें रखी हैं। इस खबर को एक मांग से अधिक, अधिकारियों के लिए एक जवाबदेही का आह्वान माना जाना चाहिए।
प्रमुख मांगें:
- मिट्टी का बांध तुरंत हटाया जाए और रास्ता अगले 24 घंटे के भीतर खोला जाए।
- जिन लोगों ने जानबूझकर रास्ता रोका है, पुलिस उनके खिलाफ IPC की उचित धाराओं के तहत मामला दर्ज करे।
- पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्वास्थ्य विभाग पानी की जांच करें और प्रदूषण पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।
- पीडब्ल्यूडी और जिला प्रशासन तुरंत सड़क की मरम्मत करें ताकि आवागमन सामान्य हो सके।
यह घटना सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे राज्य में फैले सिस्टम की विफलता है। स्थानीय लोग नेताओं से सीधा सवाल करते हैं, “क्या आपका काम सिर्फ वोट लेना है, या लोगों की सेवा करना भी?” हम जिला प्रशासन को चेतावनी देते हैं कि लोगों की आवाज को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता। यदि आज कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो जनता सड़कों पर उतरकर अपना हक हासिल करने के लिए मजबूर होगी।
