मोहाली: पंजाब भर की आशा वर्करों और आशा फैसिलिटेटरों ने अपनी न्यायसंगत मांगों को लेकर पंजाब सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। इसी कड़ी में यूनियन ने आगामी 4, 5 और 6 अगस्त को पूरे पंजाब में राज्यव्यापी भूख हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है। पीएचसी बूथगढ़, जिला मोहाली में यूनियन की सीनियर मीत प्रधान हरमनजीत कौर की मजबूत अगुवाई में एकत्र हुए पदाधिकारियों ने सरकार के रवैये पर भारी रोष व्यक्त किया और वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर अपने कड़े रुख से अवगत कराया।
हुंकार और हड़ताल का ऐलान
यूनियन पदाधिकारियों की ओर से एसएमओ साहिब को ज्ञापन सौंपते हुए साफ कर दिया गया है कि भूख हड़ताल के निर्धारित दिनों के दौरान राज्य भर की आशा वर्कर और फैसिलिटेटर स्वास्थ्य विभाग का कोई भी कामकाज नहीं करेंगी। इस हड़ताल में पूरे पंजाब से हजारों की संख्या में आशा वर्कर शामिल होकर अपनी एकजुटता और ताकत का प्रदर्शन करेंगी।
जमीनी हकीकत और आर्थिक तंगी का दंश
जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य विभाग में दिन-रात अपनी निष्ठावान सेवाएं देने के बावजूद आशा वर्कर आज गंभीर आर्थिक मंदी के दौर से गुजरने को मजबूर हैं। सरकार की ओर से उन्हें मात्र 2500 रुपये फिक्स मान भत्ता और अलग-अलग कार्यों का इंसेंटिव दिया जाता है, लेकिन यह राशि भी कभी समय पर नहीं मिलती। हरमनजीत कौर ने बताया कि इस इंसेंटिव को दोगुना कराने और फैसिलिटेटरों के टूर भत्ते को दोगुना करने के लिए वे लगातार प्रयासरत हैं।
संघर्ष के मैदान में चंडीगढ़ कूच की पुकार
अपने इस ऐतिहासिक संघर्ष को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाने के लिए हरमनजीत कौर ने पंजाब की तमाम आशा वर्करों और फैसिलिटेटरों से एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने सभी से सेक्टर 38, चंडीगढ़ स्थित प्रयास भवन में भारी संख्या में पहुंचने का आह्वान किया है ताकि भूख हड़ताल पर बैठने वाले साथियों का हौसला बढ़ाया जा सके और सरकार को मांगे मानने पर मजबूर किया जा सके।
संपादकीय टिप्पणी: जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा वर्करों और फैसिलिटेटरों का बार-बार आंदोलन के रास्ते पर जाने को मजबूर होना चिंताजनक है। नाममात्र मान भत्ते और उसमें भी अनिश्चित देरी के कारण आर्थिक तंगी झेल रहीं इन कार्यकर्ताओं की मांगें महज वित्तीय आग्रह नहीं, बल्कि उनके आत्मसम्मान और आजीविका से जुड़ा विषय हैं। सरकार को चाहिए कि स्वास्थ्य सेवाओं के पूर्णतया प्रभावित होने से पहले संवाद का मार्ग प्रशस्त करे और इनकी वाजिब मांगों का स्थायी समाधान निकाले।
