चंडीगढ़: चंडीगढ़ नगर निगम के इतिहास में आज का दिन एक नई नज़ीर बन गया, जब पहली बार जनता दरबार का आयोजन हुआ। मेयर सौरभ जोशी की अगुवाई में आयोजित इस दरबार में नगर निगम और शहर की आवाम के बीच एक अनूठा संवाद देखने को मिला। अलग-अलग सेक्टरों और कॉलोनियों से पहुंचे करीब 500 लोगों ने सीधे मेयर के सामने अपनी फरियादें रखीं। जनता दरबार में पहुंचीं ढेरों शिकायतों में से कई का निपटारा मेयर ने तुरंत प्रभाव से किया, जिससे आए हुए फरियादियों में उम्मीद की एक नई किरण नजर आई।
समस्याएं, सुझाव और सीधी बात
इस अभूतपूर्व आयोजन में शहर के हर वर्ग की भागीदारी देखने को मिली। रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से लेकर मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन, रेहड़ी-फड़ी विक्रेताओं और आम नागरिकों ने शहर से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर अपनी शिकायतें और सुझाव दर्ज कराए। इसी कड़ी में सेक्टर 15 वेंडिंग जोन के विक्रेताओं ने भी अपनी मूलभूत समस्याओं और व्यावहारिक कठिनाइयों के बारे में मेयर को विस्तार से अवगत कराया।
तंदूर वर्करों की दास्तान-ए-दर्द
जनता दरबार का सबसे चर्चित और भावुक मुद्दा तंदूर वर्करों का रहा, जो पिछले 50-60 सालों से प्रशासन और नगर निगम की बेरुखी का शिकार होते आ रहे हैं। तंदूर वर्कर यूनियन के प्रधान नरिंदर सिंह ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि तंदूर की कला उन्हें विरासत में मिली है, जिसे वे आज भी संभाले हुए हैं। हालांकि, अवैध वेंडरों की वजह से उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है और वे पिछले एक महीने से अपनी रोजी-रोटी बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
आश्वासन की किरण और आतिथ्य
तंदूर वर्करों की समस्याएं सुनने के बाद मेयर सौरभ जोशी ने उन्हें ढांढस बंधाया और आश्वासन दिया कि जितनी जल्दी संभव हो सकेगा, उनकी समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाएगा। इस पूरे आयोजन के दौरान नगर निगम की ओर से संवेदनशीलता का परिचय देते हुए आए हुए सभी फरियादियों के लिए चाय-पानी का विशेष प्रबंध भी किया गया था।
संपादकीय टिप्पणी: चंडीगढ़ नगर निगम के इतिहास में पहली बार आयोजित यह जनता दरबार केवल प्रशासनिक कार्यशैली का बदलाव नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच टूटते संवाद को पुनर्जीवित करने की एक सशक्त पहल है। वर्षों से बेरुखी और अवैध वेंडिंग की आड़ में पिस रहे तंदूर कारीगरों की गुहार यह साबित करती है कि पारंपरिक कला और आजीविका की रक्षा के लिए नीतिगत संवेदनशीलता बेहद जरूरी है। मेयर सौरभ जोशी द्वारा दिया गया आश्वासन यदि धरातल पर जल्द फलीभूत होता है, तो यह न केवल 500 फरियादियों का विश्वास बहाल करेगा, बल्कि जन-केंद्रित शासन का एक उत्कृष्ट मॉडल भी स्थापित करेगा।
