चंडीगढ़: दुनिया के कोनों में छिड़े युद्ध की लहरों ने चंडीगढ़ के शांत गलियारों में भी भय का माहौल पैदा कर दिया है। लोग अनिश्चित भविष्य को लेकर आशंकित हैं, जिसके चलते बाज़ारों और आवश्यक सेवाओं के केंद्रों पर दबाव बढ़ रहा है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस कठिन समय में नागरिकों को सावधान रहने की जरूरत है, लेकिन साथ ही अफवाहों से बचना और सरकार की गाइडलाइंस का पालन करना ही इस संकट का एकमात्र समाधान है। डर के इस दौर में संयम ही शहर की सबसे बड़ी ढाल साबित होगा।
रसोई की चिंता और सिलेंडर की नई व्यवस्था
सरकार की ओर से जारी ताजा गाइडलाइन के अनुसार, गैस सिलेंडर की किल्लत से बचने के लिए एक नई व्यवस्था लागू की गई है। अब डिलीवरी हुए सिलेंडर के 25 दिन बाद ही अगली बुकिंग कराई जा सकेगी। बुकिंग के पांच से सात दिन के भीतर सिलेंडर की डिलीवरी सुनिश्चित की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि रसोई गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, इसलिए लोगों को ‘पैनिक बुकिंग’ करने या जरूरत से ज्यादा संग्रह करने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है।
गैस एजेंसियों का संदिग्ध खेल और उपभोक्ताओं की परेशानी
जहाँ सरकार व्यवस्था सुधारने में लगी है, वहीं कुछ गैस एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। अशोक कुमार नामक व्यक्ति ने एक चौंकाने वाला मामला साझा करते हुए बताया कि उन्होंने कोई सिलेंडर बुक नहीं किया था, फिर भी उनके पास बुकिंग और डिलीवरी, दोनों के मैसेज आ गए। जब उन्होंने बुडैल स्थित सुख गैस एजेंसी में जाकर इस बारे में पूछताछ की, तो वहां कर्मचारी टाल-मटोल करने लगे। एजेंसियों द्वारा किया जा रहा यह खेल संकट के समय में आम जनता की मुश्किलों को और बढ़ा रहा है।
ईंधन की स्थिति और पेट्रोल पंपों पर जमीनी हकीकत
शहर में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति को लेकर भी स्थिति अब नियंत्रण में दिख रही है। सेक्टर 37 स्थित इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप पर लोग बिना किसी अफरातफरी के ईंधन और सीएनजी ले रहे हैं। पंप मैनेजर प्रवीण कुमार ने बताया कि दो दिन पहले लोग इस डर में गाड़ियां फुल करवा रहे थे कि शायद तेल खत्म हो जाए, लेकिन अब सप्लाई सुचारू है। शहर के अन्य पंप संचालकों ने भी पुष्टि की है कि ईंधन की कोई कमी नहीं है और पीछे से स्टॉक लगातार पहुंच रहा है।
डीजल की किल्लत और ड्रमों पर पाबंदी का पेच
ईंधन की सप्लाई के बीच एक व्यावहारिक समस्या भी सामने आई है। प्रवीण कुमार के अनुसार, उन दुकानदारों और सरकारी दफ्तरों को दिक्कत हो रही है जो जनरेटर चलाने के लिए ड्रमों में डीजल ले जाते थे। वर्तमान नियमों के तहत ड्रमों में डीजल देने पर मनाही है, जिससे जनरेटर ठप होने का खतरा मंडरा रहा है। पंप संचालकों और उपभोक्ताओं का मानना है कि सरकार को इस विशेष वर्ग के बारे में जल्द ही कोई ठोस निर्णय लेना चाहिए ताकि आवश्यक सेवाएं प्रभावित न हों।
संपादकीय टिप्पणी:
युद्ध जैसी असाधारण परिस्थितियों में संसाधनों का प्रबंधन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होती है, लेकिन चंडीगढ़ में गैस एजेंसियों द्वारा की जा रही कथित धांधली इस संकट को और गहरा सकती है। एक तरफ जहां पेट्रोल पंपों पर सप्लाई सामान्य होना राहत की बात है, वहीं जनरेटर के लिए डीजल की आपूर्ति पर लगी रोक छोटे व्यवसायों और दफ्तरों के लिए मुश्किल खड़ी कर रही है। प्रशासन को चाहिए कि वह गैस एजेंसियों की मनमानी पर नकेल कसे और डीजल वितरण की नीति में व्यावहारिक बदलाव करे, ताकि अफवाहों के बाजार को शांत किया जा सके और जनता का भरोसा बना रहे।
