चंडीगढ़: चंडीगढ़ नगर निगम के कमिश्नर अमित कुमार ने आज धनास और वार्ड नंबर 14 (वेस्ट) का औचक दौरा कर प्रशासनिक हलके में खलबली मचा दी। कमिश्नर ने दफ्तर की फाइलों से बाहर निकलकर जमीनी स्तर पर चल रहे विकास कार्यों का जायजा लिया और यह परखने की कोशिश की कि जनता को दी जाने वाली सुविधाएं असल में कितनी प्रभावी हैं। दौरे के दौरान कमिश्नर ने सीधे स्थानीय लोगों से संवाद किया, जिसके बाद कई चौंकाने वाली खामियां सामने आईं।
गंदगी पर नाराजगी और डोर-टू-डोर कलेक्शन के आदेश
दौरे के वक्त जब कमिश्नर अमित कुमार ने धनास के निवासियों से बातचीत की, तो लोगों ने अपनी समस्याओं का पिटारा खोल दिया। निवासियों ने बताया कि उनके क्षेत्र में कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां समय पर नहीं आतीं, जिसके चलते मजबूरी में उन्हें अपना कचरा पटियाला की राव नदी में फेंकना पड़ता है। इस गंभीर लापरवाही पर कमिश्नर ने सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ‘डोर-टू-डोर’ कूड़ा संग्रहण की व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त किया जाए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पार्षद संधू ने सौंपा समस्याओं का मांग पत्र
इस अवसर पर वार्ड नंबर 14 के पार्षद स. कुलजीत सिंह संधू ने अपने क्षेत्र की समस्याओं की एक विस्तृत रूपरेखा कमिश्नर को सौंपी। संधू ने विशेष रूप से सब्जी मंडी के चारों ओर बाउंड्री वॉल बनाने की मांग रखी, जिस पर कमिश्नर ने आश्वासन दिया कि तहसीलदार जल्द ही जगह चिन्हित कर इसकी रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसके अलावा, काउ डंग प्रोसेसिंग प्लांट की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने और मार्बल मार्केट में ट्रकों की पार्किंग की समस्या को हल करने पर भी सहमति बनी।
विकास परियोजनाओं की सख्त मॉनिटरिंग
कमिश्नर ने अमन चमन कॉलोनी में सड़क निर्माण के मार्ग में आ रहे अतिक्रमण को हटाने की प्राथमिकता तय की। साथ ही, 8 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनने वाले ‘अमृत सरोवर प्रोजेक्ट’ के काम की सख्त मॉनिटरिंग के निर्देश दिए ताकि सरकारी धन का सही उपयोग हो सके। ट्रैफिक की बढ़ती समस्या को देखते हुए उन्होंने ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त रूप से समाधान निकालने की बात कही। इस मौके पर चीफ इंजीनियर संजय अरोड़ा, मेडिकल ऑफिसर ऑफ हेल्थ डॉ. इंदरदीप कौर और वार्ड के अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
संपादकीय टिप्पणी: नगर निगम कमिश्नर का यह औचक दौरा चंडीगढ़ के प्रशासनिक कार्यभार में एक जवाबदेही का संकेत है। धनास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में यदि बुनियादी सुविधाएं जैसे कूड़ा संग्रहण तक उपलब्ध नहीं है और लोग नदियों को दूषित करने पर मजबूर हैं, तो यह सीधे तौर पर विभागीय विफलता को दर्शाता है। पार्षद द्वारा उठाई गई बाउंड्री वॉल और पार्किंग की मांगें शहर के नियोजित विकास के लिए आवश्यक हैं। हालांकि, केवल निर्देश देना पर्याप्त नहीं है; 8 करोड़ के अमृत सरोवर जैसे प्रोजेक्ट्स की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अधिकारी धरातल पर कितनी मुस्तैदी से काम करते हैं और अतिक्रमण जैसी चुनौतियों से कैसे निपटते हैं।
