चंडीगढ़: 2 जुलाई की सुबह जब सेक्टर 26 ग्रेन मार्केट का औचक निरीक्षण किया गया, तो वहां की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही थी। मार्केट के एंट्री पॉइंट पर तो सफाई व्यवस्था ठीक-ठाक दिखाई देती है, लेकिन जैसे ही आप इसके पिछले हिस्से की तरफ कदम बढ़ाएंगे, तो वहां का नजारा पूरी तरह बदल जाता है। मार्केट के पीछे चारों तरफ गंदगी के ढेर लगे हुए हैं और वहां से उठने वाली तीव्र बदबू के कारण लोगों का खड़ा होना भी मुहाल हो रहा है। इस स्थिति को देखकर यह बड़ा सवाल उठता है कि क्या किसी प्रशासनिक अधिकारी का ध्यान इस ओर नहीं गया है या फिर जिम्मेदार अधिकारी यहां से अपनी आंखें मूंद कर निकल जाते हैं।
बदबू का सम्राज्य और सुलगते सवाल
सफाई व्यवस्था की इस बदहाली के साथ-साथ मार्केट परिसर में एक और बड़ी समस्या तेजी से पैर पसार रही है। यहां पर लोगों ने अवैध रूप से अपनी झुग्गी-झोपड़ियां बना ली हैं और वे वहीं पर रह रहे हैं। यह स्थिति इसलिए भी ज्यादा गंभीर है क्योंकि चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से एक तरफ तो शहर को पूरी तरह से झुग्गी-झोपड़ी मुक्त घोषित किया जा चुका है, लेकिन इसके विपरीत जमीनी स्तर पर इन झुग्गी-झोपड़ियों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है।
प्रशासनिक दावों पर गहराती चिंता
मार्केट परिसर के भीतर लगातार बढ़ती झुग्गियों और सफाई के अभाव के कारण स्थानीय लोगों और आने-जाने वालों के लिए यह एक बेहद चिंता का विषय बन चुका है। प्रशासन के दावों और हकीकत के बीच का यह बड़ा फासला साफ तौर पर उजागर हो रहा है। ऐसे में चंडीगढ़ प्रशासन को इस गंभीर होती समस्या की ओर तुरंत विशेष ध्यान देना चाहिए और व्यवस्था को सुधारने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए।
संपादकीय टिप्पणी: सेक्टर 26 ग्रेन मार्केट की यह बदहाली चंडीगढ़ प्रशासन के स्वच्छता और अतिक्रमण मुक्त शहर के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलती है। एंट्री पॉइंट को साफ रखकर पीछे गंदगी का अंबार लगाना सिर्फ प्रशासनिक ढिलाई नहीं, बल्कि जनता को धोखे में रखने जैसा है। इसके साथ ही, झुग्गी-झोपड़ी मुक्त घोषित शहर की नाक के नीचे अवैध बस्तियों का दोबारा बढ़ना प्रशासनिक जवाबदेही पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। प्रशासन को केवल कागजी घोषणाओं तक सीमित रहने के बजाय धरातल पर उतरकर इस गंदगी और अवैध निर्माण पर सख्त कार्रवाई करनी होगी, ताकि शहर की कानून व्यवस्था और स्वच्छता का स्तर कायम रह सके।
