चंडीगढ़: निर्जला एकादशी के पावन एवं पुण्यदायी अवसर पर तनुष फाउंडेशन, चंडीगढ़ द्वारा सेक्टर-37 स्थित महाजन भवन के समक्ष श्रद्धापूर्वक ठंडे मीठे पानी की छबील लगाई गई। इस सेवा कार्य का उद्देश्य भीषण गर्मी के बीच राहगीरों एवं आमजन को शीतल जल उपलब्ध कराना तथा मानव सेवा के माध्यम से धर्म एवं पुण्य के मार्ग को आगे बढ़ाना था। इस पुण्य कार्य ने चिलचिलाती धूप में निकलने वाले हर राहगीर को बड़ी राहत पहुंचाई।
प्राचीन संस्कृति और परमार्थ का अनूठा संगम
इस विशेष धार्मिक अवसर पर तनुष फाउंडेशन के चेयरमैन श्री औम प्रकाश मैहरा ने उपस्थित जनसमूह के बीच अपने विचार सांझा किए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व है और इस पवित्र दिन पर किए गए दान, सेवा एवं परोपकार के कार्यों का अत्यंत पुण्य प्राप्त होता है। चेयरमैन ने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि मानव सेवा ही सच्ची ईश्वर सेवा है और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को जरूरतमंदों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए।
सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश
फाउंडेशन की प्रधान श्रीमती रानी वालिया ने इस सेवा मुहिम को आगे बढ़ाते हुए समाज में इसके गहरे प्रभाव को रेखांकित किया। उनका कहना था कि ऐसे धार्मिक एवं सामाजिक सेवा कार्य समाज में प्रेम, भाईचारे एवं मानवता की भावना को मजबूत करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने छबील सेवा में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले सभी उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया, जिनके प्रयासों से यह आयोजन सफल हो सका।
सेवादारों का अटूट श्रद्धाभाव और जन कल्याण का संकल्प
इस पावन सेवा कार्य में डॉ. मीना चड्ढा, सरदार दलजीत सिंह पम्मा, सरदार बलवीर सिंह बीरा, श्री रोहित वालिया एवं श्रीमती मनीषा वालिया सहित फाउंडेशन के अन्य सदस्यों ने पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ भाग लिया। इन सभी सेवादारों ने आने-जाने वाले लोगों को अपने हाथों से ठंडा मीठा पानी वितरित कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। राहगीरों एवं स्थानीय लोगों ने तनुष फाउंडेशन द्वारा किए गए इस सराहनीय सेवा कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की तथा संस्था के सामाजिक एवं जनकल्याणकारी प्रयासों की सराहना की। इस पूरे कार्यक्रम का विधिवत समापन समाज की सुख-समृद्धि, शांति एवं मानव कल्याण की कामना के साथ हुआ।
संपादकीय टिप्पणी: निर्जला एकादशी जैसे धार्मिक अवसरों पर तनुष फाउंडेशन द्वारा चंडीगढ़ के सेक्टर-37 में लगाई गई छबील केवल एक पारंपरिक सेवा कार्य नहीं है, बल्कि यह चिलचिलाती गर्मी में तड़पते जनमानस के प्रति संवेदना का प्रतीक है। जब आधुनिक समाज में लोग अपनी दिनचर्या में अत्यधिक व्यस्त हैं, तब ऐसे जनकल्याणकारी प्रयास मानवता और सामाजिक भाईचारे की नींव को मजबूत करते हैं। चेयरमैन औम प्रकाश मैहरा और प्रधान रानी वालिया का यह दृष्टिकोण कि मानव सेवा ही सच्ची ईश्वर सेवा है, इस बात की पुष्टि करता है कि धार्मिक त्योहारों की सार्थकता केवल उपवास और पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने में है। ऐसे आयोजन प्रेरणा देते हैं कि सक्षम संस्थाओं और नागरिकों को जनहित के कार्यों में निरंतर बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए ताकि समाज में परस्पर सहयोग की भावना सदैव जीवित रहे।
